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पारस पीपली पारस पीपली व्हैती रे बना के छायां भी करती घड़ी दोय छायां में रेतो रे पलक दोय तावड़ले रेतो मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी पेचो पचरंग्यो व्हैती रे बना के शीश पे रैती घड़ी दोय शीश पे रेती रे नीतर पैयां में रेती मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी मुरक्यां हीरा की व्हैती रे बना के कानां में रैती घड़ी दोय कानां में रेती रे नीतर डाब्यां में रेती मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी गमछो सतरंग्यो व्हैती रे बना के कमरियां में रैती घड़ी दोय कमरियां में रेती रे पलक दोई ताकां में रेती मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी रुमाली मोचड़ी व्हैती रे बना के पांवां में रैती घड़ी दोय पांवां में रेती रे नीतर पोल्यां में रेती मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी पारस पीपली व्हैती रे बना के छायां भी करती घड़ी दोय छायां में रेतो रे पलक दोय तावड़ले रेतो मारो ळळवलयो बनो रे बनी स्यूं बोल तो खरी मारो कांतीलो बनो रे बनी स्यूं बोल तो सरी यह गीत बन्ना बन्नी की आपसे प्यार और मनुहार का बढ़िया गीत है इस गीत में बन्नी अपने बन्ने से कह रही है कि अगर मैं पारस पिपली होती तो तुम मेरी छाया में रहते अगर मैं पचरंगी पैचा अर्थात साफा होती तो मैं आपके सिर पर सोहती अगर मैं रूमाली मोजड़ी होती तो पांव में रहती इस तरह से वह अपने दूल्हे राजा को हर तरह से मना रही है उसके प्यार और मीठी मनोहर से यह गीत बहुत ही रोमांटिक बन पड़ा है इसमें एक दूसरे के प्रति समर्पण का राजस्थानी संस्कृति का एक अद्भुत खजाना है इसे सुनना एक बहुत कर्ण प्रिय लगता है जांगिड़ लोक गीत रामविलास जांगिड़ अजमेर द्वारा स्थापित राजस्थानी लोक गीत रस धारा प्लेटफॉर्म का उद्देश्य महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले बहुत पुराने राजस्थानी लोक गीतों की समृद्ध परंपरा को संरक्षित विकसित और पल्लवित करना है इस मंच पर राजस्थानी लोक गीत भाषा और संस्कृति के अनमोल रत्नों को प्रदर्शित किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी इनसे जुड़ सके और लोक गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को समझते हुए इसे संरक्षित कर सके यह प्लेटफार्म राजस्थान के ग्रामीण जीवन लोक संगीत और पारंपरिक गीतों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है जो लोक कला के प्रति समझ और सम्मान बढ़ाने में बड़ा सहायक है इंदिरा जांगिड़ (9413 601939) प्रबंधक जांगिड़ लोक रस धारा 18 उत्तम नगर घूघरा अजमेर (राजस्थान) 305023