У нас вы можете посмотреть бесплатно भैरों लंगूर गढ़ी(कालनाथ भैरव)।।Bhairon Langoor Gadhi(Kaalnath Bhairav)।।Rakesh Tamta।। или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
गायक/गीत/संगीत- राकेश टम्टा संगीत संयोजन- मोती शाह रिदम- सुभाष पांडे परिकल्पना- मुकेश टम्टा सहयोग- सुनील रौथाण रिकार्डिस्ट- सागर शर्मा एडिटर- आदित्य चौहान निर्माता- राकेश चौहान Plz join us at our another youtube channal and do subscribe like and share. / @rakeshtamtamusic श्री नागदेव गढ़ी का एकमात्र भजन सुनने के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें। भजन पसंद आने पर चैनल को सब्सक्राइब कीजिये। • जय हो बाबा नागदेव गढ़ी||JAI HO BABA NAGDEV ... • जय हो बाबा नागदेव गढ़ी||JAI HO BABA NAGDEV ... विशेष आभार श्री सुरेश बलूनी (पेज गढ़वाल_की _संस्कृति ) 👇 / garhwalisanskritiuttrakhand / @garhwalkisanskriti श्री राजेश सिंह रावत -व्लोगर pahadi daaju rajesh bhai ji (चैलूसेंण) 👇 / @pahadibhularawatji श्री सरदार सिंह जी जागरी(बमोली) श्री सुरेश खेतवाल जी (कुल्हाड़ गाँव) श्री भैरव गढ़ी- भगवान शिव के १५ अवतरों में भैरवगढ़ी का नाम भी आता है। और इन्ही कालभैरव का सुप्रसिद्ध धाम भैरवगढ़ी है। लैन्सडाऊन से लगभग १७ किलोमीटर दूर राजखील गांव की पहाड़ी पर यह देवस्थल स्थित है। इस स्थल पर कालनाथ भैरव की नियमित पूजा होती है। कालनाथ भैरव को सभी चीजें काली पसंद होती हैं यही कारण है कि कालनाथ भैरव के लिये मण्डवे के आटे का रोट प्रसाद के रूप में बनाते हैं। गढ़वाल के रक्षक के रूप में अर्थात द्वारपाल के रूप में भैरव (भैरों) का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। भैरव के अनुयायी पुजारी और साधक भैरवगढ़ी की चोटी पर जाकर साधना कर आज भी सिद्धि प्राप्त करते हैं । इस स्थान का अपना एक एतिहासिक महत्व भी है। भैरवगढ़ गढ़वाल के ५२ गढ़ों में से एक है और इसका वास्तविक नाम लंगूरगढ़ है। संभवतया लांगूल पर्वत पर स्थित होने के कारण इसे लंगूरगढ़ कहा गया है। लंगूरगढ़ सन १७९१ तक बहुत शक्तिशाली गढ़ था । दो वर्ष तक गोरखों की फौज ने इसे जीतने के लिये घेराबन्दी की थी २८ दिनों तक निरंतर संघर्ष के उपरान्त भी गोरखा पराजित हुये और वापस चले गये थे । थापा नामक एक गोरखे ने लंगूरगढ़ में भैरव की महिमा को देखते हुये वहां ताम्रपत्र चढ़ाया था इस ताम्रपत्र का वजन एक मन (४० किलो) का बताया जाता है । यहां भैरव की गुमटी पर ही मन्दिर बना हुआ है। गुमटी के बाहर बायें हिस्से में शक्तिकुण्ड है। यहां भक्तों के द्वारा चांदी के छत्र चढ़ाये जाते हैं। यहां श्रद्धालु भक्तजन नित्य ही पहुंचते हैं। यहां नवविवाहित वर वधु भी मनौतियां मांगने पहुंचते हैं। #langoorgadhibhairon #Rakeshtamtasong #भैरों लंगूर गढ़ी #Rakeshtamt #GoluGarhwali