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गुरु और डॉक्टर को एकसमान दर्जा क्यों दिया जाता है..?? || H.H. Shree Shivkrupanand Swamiji || एकलव्य की कहानी तो हम सब ने सुनी ही है। गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को कहा था कि में सिर्फ राजपुत्रों की विद्या सिखाता हु में तुम्हे नहीं सिखा सकता। पर एकलव्य को तो गुरु द्रोण से ही विद्या सीखनी थी उसने गुरु द्रोणाचार्य को अपना गुरु मान लिया था। फिर उसने एक गुरु द्रोण की प्रतिमा बनाई, वो कोई शिल्पकार नहीं था तो मूर्ति कैसे बनी होगी आप समझ सकते हो। लेकिन फिर भी एकलव्य ने उस मूर्ति के प्रति अपना संपूर्ण समर्पण किया और सारा ही ज्ञान प्राप्त कर लिया। और गुरुदक्षिणा के रूप में अपने अंगूठा काट कर समर्पित किया। वास्तव में अंगूठा अंहकार का प्रतीक है। #gurutattva #gurutattvampofficial #samarpan #ishasamarpan #shreeshivkrupanandswami #meditation #swamiji #discourse #gurutattvampofficial