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मंत्र तंत्र यंत्र चॅनेल मे आप सभी का स्वागत है आज मे आप सभी के लिये एक ऐसा शाबर मंत्र लेकर आया हु जिसे स्वयं महायोगी गुरु गोरखनाथ ने सिद्ध किया था..." आज मैं आपको मंत्र सिद्धि की संपूर्ण विधि बताने जा रहा हूं। यह अत्यंत गूढ़ और शक्तिशाली साधना है। ध्यान से सुनिए और हर बात को गांठ बांध लीजिए। सबसे पहले बात करते हैं... कब शुरू करें? देखिए साधकों... मंगलवार या गुरुवार से इस साधना को प्रारंभ करना चाहिए। और हां... शुक्ल पक्ष में प्रारंभ करना सबसे उत्तम है। अगर आप पूर्णिमा, अमावस्या या एकादशी के दिन शुरू कर सकें... तो यह सोने पे सुहागा है! लेकिन ध्यान रखिए! रविवार को, ग्रहण काल में, या अमावस्या की मध्य रात्रि में... कभी शुरुआत मत कीजिए। यह वर्जित है! अब सुनिए... 40 दिन की यह साधना है। और इन 40 दिनों में आपको कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। पहला नियम - पूर्ण ब्रह्मचर्य! बिना ब्रह्मचर्य के यह साधना सफल नहीं होगी। दूसरा नियम - सात्विक भोजन! एक समय भोजन करें। और अगर आप निराहार या फलाहार पर रह सकें... तो बहुत श्रेष्ठ है! मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन... इन सबसे दूर रहिए। तीसरा नियम - यथासंभव मौन रहें। जितना कम बोलेंगे... उतनी ऊर्जा बचेगी। चौथा नियम - भूमि शयन करें। कठोर बिस्तर पर सोइए। आराम की तलाश में सिद्धि नहीं मिलती! अब आता है असली काम! ब्रह्म मुहूर्त में उठिए। सूर्योदय से पहले... जब सारी दुनिया सो रही हो... तब उठकर स्नान करें। गंगाजल से स्नान करें। अगर गंगाजल न हो... तो शुद्ध जल से। स्नान करते समय "ॐ गं गणपतये नमः" का उच्चारण करें। स्नान के बाद... भगवा वस्त्र धारण करें। नए और धुले हुए वस्त्र पहनें। गले में रुद्राक्ष की माला पहनें... और दाहिने हाथ में कलावा बांधें। अब आसन बिछाइए। काली कंबल या भगवा आसन बिछाएं। आसन के नीचे कुश का आसन रखें। ध्यान रखें! पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। यह बहुत महत्वपूर्ण है! अपने सामने... एक चौकी रखें। लाल या पीले वस्त्र से ढकें। उस पर दत्तात्रेय भगवान का चित्र या प्रतिमा रखें। दोनों तरफ देसी घी का दीपक जलाएं। धूप-दीप की व्यवस्था करें। पूजन सामग्री तैयार रखें - पंचामृत, गंगाजल, पुष्प, चंदन, रोली, अक्षत, नारियल, फल, मिठाई... सब कुछ पहले से व्यवस्थित कर लें। सुनिए साधकों... यह सबसे महत्वपूर्ण है! बिना गुरु स्मरण के... कोई साधना सफल नहीं होती! सबसे पहले... तीन बार प्राणायाम करें। अनुलोम-विलोम करें। मन को शांत करें। फिर तीन बार जल से आचमन करें। अब संकल्प लें... मन में दृढ़ता से संकल्प करें कि "मैं 40 दिन तक नियमित रूप से यह साधना करूंगा!" अब गुरु स्मरण करें... क्रमवार: पहले... आदिनाथ शिव का स्मरण करें। फिर... गुरु मच्छिंद्रनाथ का स्मरण करें। फिर... गुरु गोरखनाथ का स्मरण करें। और अंत में... अपने इष्ट गुरु का स्मरण करें। गुरु मंत्र का जप करें: 11 बार बोलिए - "ॐ गुरु गोरखनाथाय नमः" 11 बार बोलिए - "ॐ श्री मच्छिंद्रनाथाय नमः" बिना गुरु कृपा के... मंत्र सिद्धि असंभव है! यह याद रखिए! अब आता है मुख्य जप! माला का चुनाव करें: रुद्राक्ष की माला... काली हकीक की माला... या तुलसी की माला। जो भी माला हो... 108 मनकों वाली होनी चाहिए। जप करने का सही तरीका सुनिए: मध्यमा और अंगूठे से माला फेरें। तर्जनी उंगली का इस्तेमाल बिल्कुल मत करिए! यह वर्जित है! सुमेरु मणि को कभी लांघिए मत। जब सुमेरु आए... तो माला को उल्टी दिशा में फेरना शुरू कर दीजिए। प्रतिदिन कम से कम 108 बार जप करें। एक माला! लेकिन अगर आप 3 माला या 5 माला कर सकें... तो परम उत्तम है! जप करते समय ध्यान रखें: मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें। मुंह से बोलें... लेकिन धीरे-धीरे। दत्तात्रेय भगवान के स्वरूप पर ध्यान लगाएं। नासिका के अग्र भाग पर... या भ्रूमध्य पर अपनी दृष्टि रखें। मन में मंत्र के अर्थ पर चिंतन करते रहें। देखिए... यह 40 दिन का सफर है। पहले 10 दिन - आपकी माला में मंत्र का संचार होगा। माला चार्ज होगी। 11 से 20 दिन - मंत्र शक्ति जागृत होने लगेगी। आपको अनुभूति होने लगेगी। 21 से 30 दिन - मंत्र की ऊर्जा स्थिर होगी। आप बदलाव महसूस करेंगे। 31 से 40 दिन - मंत्र सिद्धि की प्राप्ति होगी! आपका संकल्प शक्तिशाली होगा! सुनिए ध्यान से! नियमितता - एक भी दिन मत छोड़िए! एक दिन छोड़ा... तो सब मेहनत बेकार! समय - रोज एक ही समय पर जप करें। आज सुबह... कल शाम... ऐसा नहीं चलेगा! स्थान - जहां तक हो सके... एक ही जगह पर बैठें। पवित्रता - शरीर और मन... दोनों शुद्ध रखें। गोपनीयता - किसी को मत बताइए कि आप साधना कर रहे हैं। मौन रहें! जब मंत्र सिद्ध होगा... तो ये संकेत मिलेंगे: मंत्र अपने आप जुबान पर आने लगेगा। स्वप्न में गुरु के दर्शन होंगे... या देवता के दर्शन होंगे। मन में अद्भुत शांति... एक अलौकिक आनंद महसूस होगा। आपके चेहरे पर तेज आएगा। ओज बढ़ेगा। आपकी संकल्प शक्ति प्रबल हो जाएगी! याद रखिए! साधना काल में क्रोध मत करिए... काम-वासना से बचिए... लोभ से दूर रहिए। श्मशान, वधस्थल... ऐसी जगहों से दूर रहें। रात में अकेले जप कर रहे हैं... तो सुरक्षित स्थान चुनें। अगर कोई दिन छूट जाए... तो फिर से संकल्प लेकर शुरू करें। और हां... 40 दिन पूरे होने के बाद... गुरु को भोज कराएं या दान करें। यह अति आवश्यक है! यह शाबर मंत्र मैं आप सभी के लिए जाप करके दे रहा हूं कृपया इसे प्रतिदिन सुने और लाभ लें चैनल को शेयर करें सब्सक्राइब करें इसी गुरु दक्षिणा की हम आपसे आशा करते हैं धन्यवाद आदेश गुरु गोरखनाथ का...आदेश दत्तात्रेय का...आदेश मच्छिंद्रनाथ का... मंत्र गुरु गोरखनाथ परंपरा का शाबर मंत्र: ॐ गोरख गोरख गोरख दत्त। मच्छिंद्र नाथ की शक्ति, दत्तात्रेय की भक्ति। जहां बैठूं तहां सिद्धि, जहां देखूं तहां रिद्धि। गुरु गोरख की आज्ञा, दत्त दिगंबर की शक्ति। आदेश गुरु का, आदेश दत्त का। फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।।