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एक अम्मा जी की सुबह-सुबह बड़ी-बड़ी रोटियों की मां नर्मदा जी के तट पर भोजन प्रसादी #भोजन प्रसादी#अम्मा जी की सात्विक भोजन प्रसादी#सिद्ध संत मैं कुछ दिन पहले अपने मामा के घर मां नर्मदा जी के तट बरमान घाट पर गया धा जल्दी सुबह उठकर मां नर्मदा जी के दर्शन करने के लिए मैया के तट पर आ गया सुबह-सुबह के समय मैया के बड़े सुंदर दर्शन हो रहे थे और कहीं से रोटी सिंकने की खुशबू आ रही थी कुछ ही दूरी पर जाकर देखा तो एक बुजुर्ग अम्मा जी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी पर रोटी बना रही थी रोटियां का साइज बहुत बड़ा था मैं अम्मा जी के पास बैठ गया और उनसे बातें करने लगा उन्होंने जीवन की अपनी दुख भरी कहानी बताई और वह काफी दुखी हो रही थी लेकिन मैं उनसे हंसी-खुशी से बातें कर रहा था ताकि वह अधिक दुखी ना हो पाए और उनके द्वारा बनाया जा रहा है भोजन को भी देख रहा था वह परंपरागत तरीके से चूल्हे पर भोजन बना रही थी चूंकि कई वर्षों से वह मां नर्मदा जी के तट पर ही बरसात में ,ठंड में, गर्मी में खुले में ही रहती हैं उनके पास ओढ़नी बिछाने के लिए और घर गृहस्थी का बहुत ही कम समान है वह एक संत का जीवन जी रही हैं और भगवान का भजन और भक्ति कर रही हैं उन्होंने बड़ी-बड़ी रोटियां बनाई और टमाटर की सब्जी बहुत ही कम मसाले में बनाई इसके बाद फिर भगवान को और मां नर्मदा जी को भोग लगाया भोजन बहुत ही अधिक स्वादिष्ट था अम्मा जी की बातों ने हमें यह बताया कि दुख में भी हमेशा खुश रहना चाहिए और भगवान का भजन और भक्ति करते रहना चाहिए मन में संतुष्टि रखना चाहिए तो हम सुखी और आनंद से जीवन व्यतीत कर सकते हैं