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आसान काम नहीं था फूलमंडी पर कब्जा लेना “काशीवार्ता” की पहल पर नगर निगम ने किसानो के लिए मंडी शुल्क किया फ्री वाराणसी इंग्लिशिया लाइन-मलदहिया स्थित फूलमंडी के किसानो को 40 साल बाद आज़ादी मिली है। ”काशीवार्ता” की पहल पर यह सब कुछ संभव हो सका है। हालांकि, इस मुहिम को अंजाम तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की है। जिनके निर्देश पर सहायक नगर अधिकारी अनिल यादव ने कार्रवाई की। इस पर कब्जा जमाए विशाल दुबे की याचिका हाईकोर्ट में न केवल खारिज हुई बल्कि निगम की तहरीर पर उसके खिलाफ मुक़दमा भी दर्ज हुआ। दरअसल, नगर आयुक्त ने ख़ुद इस मामले की सुनवाई की। जिसका परिणाम यह रहा कि हाईकोर्ट में कब्जेदार की एक न चली और याचिका ख़ारिज हो गई। हाल के दिनों में यह दूसरा मौक़ा है जब नगर निगम के पक्ष में अदालती फ़ैसला आया। इसके पहले बनारस के सिविल जज हितेश अग्रवाल ने सारनाथ में भीटे के ज़मीन के मामले में भूमाफिया गुप्तेश्वर सिंह के ख़िलाफ फ़ैसला दिया था। यहाँ पर ये बताना ज़रूरी है कि “काशीवार्ता” में इससे सम्बंधित ख़बर प्रकाशित होने के बाद ही नगर निगम एक्शन मोड में आया। जिसके बाद किसानो के हित में निगम ने ऐतिहासिक निर्णय लिया, और मंडी शुल्क को खत्म कर दिया। क्यूंकि निगम ने फूलमंडी को किसानो के हित में बिल्कुल फ्री कर दिया है। इस फैसले से किसानो में हर्ष की लहर है।