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कहानी: गर्मी की लहर और एक नई शुरुआत उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे हरिपुर में, सरिता और सुरेश नाम के एक साधारण दंपति अपने दो बच्चों — बेटी रिया (10 साल) और बेटा छोटू (8 साल) — के साथ एक पुराने से मिट्टी के मकान में रहते थे। उनका घर इतना छोटा था कि एक कमरे में सब सोते थे, और छत पर टिन की चादर लगी हुई थी जो गर्मियों में तवे की तरह तप जाती थी। सुरेश पास के एक बड़े जमींदार सेठ बलराम सिंह के खेतों में मजदूरी करता था। सुबह-सुबह सूरज निकलते ही वह खेतों की ओर निकल पड़ता, हल चलाता, खर-पतवार साफ करता, और शाम को थका-हारा लौटता। सरिता पास के एक बड़े घर में काम करती थी, जहां अमीर परिवार शर्मा जी रहते थे — श्रीकांत शर्मा, उनकी पत्नी मंजू शर्मा और उनके दो बच्चे — बेटी नेहा (12 साल) और बेटा आरव (9 साल)। सरिता वहां झाड़ू-पोंछा, बर्तन मांजना और कभी-कभी खाना बनाने का काम करती। इस साल गर्मी ने सबके सब्र का इम्तिहान ले लिया था। तापमान दिन में 45 डिग्री तक पहुंच जाता, और रात में भी 38 डिग्री से नीचे नहीं आता। हरिपुर के लोग कहते, “भईया, इस बार तो अग्नि परीक्षा लग रही है।” लोग दिन भर पसीने में तर-बतर रहते। सुरेश खेत में काम करते-करते कई बार चक्कर खा जाता, पानी की बोतल साथ रखनी पड़ती। सरिता भी घर के काम के बाद थककर चूर हो जाती। बच्चे स्कूल जाते, लेकिन स्कूल में भी पंखे सिर्फ हवा हिलाते, ठंडक नहीं देते। एक दिन सुबह सुरेश ने सरिता से कहा, “अरे सरिता, आज सेठ जी के यहां बहुत काम है। शाम को लौटूंगा तो देर हो सकती है। तुम बच्चों को स्कूल छोड़ देना।” सरिता ने सिर हिलाया, “ठीक है। लेकिन तुम पानी ज्यादा पीना, नहीं तो लू लग जाएगी।” सरिता बच्चों को सरकारी स्कूल छोड़कर शर्मा जी के बंगले पहुंची। मंजू शर्मा ने दरवाजा खोला और बोलीं, “अरे सरिता, आज जल्दी आ गई? अच्छा है। आज आरव का जन्मदिन है। शाम को पार्टी है। सारे काम दोपहर 4 बजे तक खत्म कर देना। उसके बाद घर सजाने में हाथ बंटाना। मेहमान आएंगे, सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए।” सरिता ने मुस्कुराकर कहा, “जी मेमसाब, मैं सब संभाल लूंगी।” पूरे दिन सरिता ने मेहनत की — फर्श धोया, बर्तन चमकाए, रसोई साफ की। फिर मंजू के साथ मिलकर घर सजाया — बलून्स लगाए, रंग-बिरंगी लाइटें सजाईं, टेबल पर केक और स्नैक्स रखवाए। शाम होते-होते सब तैयार हो गया। मंजू ने कहा, “अच्छा सरिता, अब तुम जा सकती हो। लेकिन शाम 7 बजे अपने बच्चों के साथ आ जाना। पार्टी में आना, थोड़ी मदद भी चाहिए होगी। बच्चों को भी मजा आएगा।” सरिता खुश होकर बोली, “जी मेमसाब, जरूर आऊंगी।” घर लौटकर सरिता ने रिया और छोटू को अच्छे कपड़े पहनाए। शाम 7 बजे वे तीनों शर्मा जी के बंगले पहुंचे। पार्टी धूमधाम से शुरू हुई — म्यूजिक, डांस, ढेर सारा खाना। रिया और छोटू इतने बड़े और खूबसूरत घर को देखकर हैरान थे। बाहर धूप में तप रहे थे, लेकिन अंदर इतनी ठंडक कि मुंह से सांस निकल रही थी। रिया ने छोटू से फुसफुसाकर कहा, “देख छोटू, यहां कितनी ठंड है। जैसे कोई जादू हो गया हो।” तभी आरव ने उनकी बात सुन ली और मुस्कुराकर बोला, “यह जादू नहीं, एयर कंडीशनर है। हमारे हर कमरे में लगा है। बाहर गर्मी हो या बारिश, अंदर हमेशा वसंत जैसा रहता है।” छोटू की आंखें चमक उठीं, “वाह! क्या हम भी अपने घर में एसी लगवा सकते हैं दीदी?” रिया ने हंसकर कहा, “पापा से बोलेंगे ना।” केक कटने के बाद बच्चे खेलने लगे। रिया और छोटू एसी की ठंडी हवा का मजा लेते हुए आरव के कमरे की तरफ चले गए। कमरे के बाहर खड़े होकर ठंडी हवा महसूस की, फिर अंदर चले गए। आरव का बिस्तर इतना मुलायम था कि दोनों उस पर बैठ गए। ठंडक ऐसी लग रही थी जैसे कोई ठंडी चादर ओढ़ ली हो। बातें करते-करते, हंसते-खेलते दोनों की आंख लग गई और वे सो गए। करीब आधे घंटे बाद नेहा कमरे में आई। उसे अपने बिस्तर पर दो अजनबी बच्चे सोते दिखे तो गुस्सा आ गया। वह चिल्लाई, “मम्मी! जल्दी आओ! ये दोनों मेरे बिस्तर पर क्या कर रहे हैं? इनके कपड़े कितने गंदे हैं!” मंजू दौड़कर आईं। सरिता भी आवाज सुनकर भागी-भागी पहुंची। मंजू ने गुस्से में कहा, “उठो दोनों! अभी के अभी मेरे बच्चों के बिस्तर से नीचे उतरो! तुम्हारे गंदे कपड़ों से पूरा बिस्तर खराब कर दिया। एसी देखकर सोने चले आए? हद हो गई! मैंने तुम्हें इसलिए बुलाया था कि तुम्हारे बच्चों को भी थोड़ा अच्छा लगे, लेकिन तुमने अपनी औकात भूलकर मेरे घर को धर्मशाला समझ लिया।” सरिता हाथ जोड़कर बोली, “मेमसाब, बच्चे छोटे हैं, नादान हैं। गलती हो गई। माफ कर दीजिए। आगे से ऐसा नहीं होगा।” मंजू ने सख्ती से कहा, “नहीं सरिता, अब बस। तुम और तुम्हारे बच्चे अभी यहां से निकलो। और कल से काम पर आने की जरूरत नहीं।” सरिता रोते हुए बच्चों को लेकर घर लौटी। अब घर में सिर्फ सुरेश की कमाई थी, जो पहले ही मुश्किल से चल रही थी। अगले कुछ दिन बहुत कठिन बीते। राशन खत्म हो गया। एक रात सरिता ने सुरेश से कहा, “सुरेश जी, आज घर में कुछ नहीं है। बच्चों को क्या खिलाऊं?” सुरेश ने कहा, “चिंता मत करो। आज सेठ जी के यहां मेहमान थे, उन्होंने बच्चों के लिए कुछ खाना भिजवाया है। आज तो यही खा लेंगे।” अगली सुबह सरिता फिर मंजू के पास गई, उधार मांगने। लेकिन मंजू ने दरवाजे पर ही टाल दिया, “जाओ यहां से। मैंने कहा ना, अब मत आना!” लौटते समय सरिता की नजर एक दीवार पर लगे पोस्टर पर पड़ी — “चाट-पकौड़ी की दुकान के लिए अनुभवी सहायक चाहिए। अच्छा वेतन। संपर्क: 98xxxxxxx” सरिता ने सोचा, “मुझे चाट-पकौड़ी बन दुकान का मालिक विकास भैया था। उसने पूछा, “तुम्हें पकौड़े, समोसे, चाट बनाना आता है?” सरिता ने कहा, “जी, बहुत अच्छे से। मिर्ची, आलू, पनीर, पालक — सब बनाती हूं।” #cartoonstory #emotionalstory #moralstory #cartoonvideo #viralstory #hearttouchingstory #holi2026 #buranamanoholihai #emotionalkahani Garmi ka kahar Hindi kahani| Hindi Kahanil MoralStories| @Suno_ek_kahani1