У нас вы можете посмотреть бесплатно भजन || राम का रामद्वारा है ||संत दिग्विजयराम जी || Sant Digvijayram Ji || श्री रामनिवास धाम शाहपुरा или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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महाप्रभु स्वामी जी श्री रामचरण जी एवं अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय || Sant Digvijayram Ji || श्री रामनिवास धाम शाहपुरा रामचरण जी प्रकट्या रामनाम दातार । ता पद लगीये रामजन्न गुरु उतारे पार ।। भारत की पावन वसुंधरा ने समय-समय पर राष्ट्रीय व राम रत्नों को अविभूर्त किया है। इसी अविस्मरणीय श्रंखला में रामस्नेही संप्रदाय के जन्मदाता युगदृष्टा तपःपुत्र ब्रह्मानिष्ठ महापुरुष श्री रामचरण जी महाराज का प्रकट्या माघ शुक्ला चतुर्दशी शनिवार वि. सं. 1776 तदर्थ 22.17.20 को सोडा ग्राम ( जिला टोंक ) में हुआ । पिता श्री बखतराम जी एवं माता देऊ जी ने ऐसी विभूति कोप्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट कर संपूर्ण संसार मैं अध्यात्म का अखंड आलोक फैलाया ।विक्रम संवत 1808 (सन 1782) भदवा शुक्ल अष्टमी गुरुवार को ब्रह्म अर्शपर्श सदगुरु श्री कृपाराम जी महाराज की कृपा पात्र बनकर गुरु दीक्षा से धन्य हो गए 9 वर्ष की कठोर अनवरत नाम साधना अनुभूतियों से विक्रम संवत 1817 सन 1761 में रामस्नेही संप्रदाय की गहरी नीव भीलवाड़ा की पावन धरती पर डाली । 12 वर्ष की प्रबल तम साधना के फलस्वरुप विक्रम संवत 1820 सन 1764 मैं आपके श्री मुख से ज्ञान भक्ति वैराग्य रूपी त्रिपगाथा पूज्य ऑन अणभवाणी मुखरित हुई 36397 छन्दो वाली वाणी जी,महाप्रभु का वांग्मय स्वरूप आज जन-जन के ह्रदयों मैं श्रद्धा के साथ विराजमान है तिरे बहुत तिरसी घणा, अजहुँ तिरत अपार । रामचरण महाराज के बेन एन उर धार ॥ भगवान शंकर द्वारा 10000 वर्ष पूर्व की गई भविष्यवाणी "यह रामभक्त वितराग महापुरुष तपस्या करेंगे । जिसमें यह स्थान देश विदेश में तीर्थस्थली के रूप में विख्यात होगा और अनेकानेक नर नारी राम नाम के प्रभाव से धन्य होंगे ॥"को पूर्ण करने हेतु स्वामी श्री रामचरण महाप्रभु शाहपुरा नरेश रण सिंह जी की अर्जी पर विक्रम संवत 1826 सन 1770 में शाहपुरा धाम पधारे ।राजा के द्वार महलों में पधारने की अर्जी को अस्वीकारते हुए निर्जन स्थल में अपना आसन लगाया । ज्ञान भक्ती वैराग्य की गंगा बहाते ,अनंत भक्तों का उद्धार करते,अनेकानेक प्रभावत्मक चमत्कारों से जन-जन को कृतार्थ करते हुए " राम" की उपासना का सीधा, सरल ,सुगम मार्ग बता आप वैशाख कृष्णा 5 गुरुवार विक्रम संवत 1855 तदर्थ दिनांक 5 अप्रैल 1798 को ब्रह्मलीन हो गए । आपके शिष्यों की संख्या 225 थीएवं संप्रदाय में साधुओं की संख्या 700 थी ।प्रमुख शिष्यों में वीतराग स्वामी जी श्री रामजन्न जी महाराज हुए जो प्रथम आचार्य बने ।गृहस्थ शिष्यों में देवकरण जी तोषनीवाल, नवलरामजी मंत्री, कुशलराम जी बिरला एवं भक्तिमई स्वरूपा बाई थी । जहां महाप्रभु स्वामी श्री रामचरण की पार्थिव देव का अग्नि संस्कार हुआ वहीं पर अष्टकोण में समाधि स्तंभ आज विद्यमान है और उसी के आधार पर श्री रामनिवास वैकुंठधाम का भव्य साधना स्थल बना हुआ है जहां लाखों नर नारी प्रतिवर्ष दर्शन को आते हैं और प्रताप से मुक्ति पाते हैं । " राम "परम तत्व है ।यह सार तत्व बीज रूप एवं ब्रह्मा विष्णु महेश तथा वेदों का प्राण है एवं महामंत्र है।सारे तत्व राम में ही समाहित है एवं राम सभी तत्वों में निहित है पद्म पुराण उत्तराखंड 6 अध्याय 71 में शिवजी ने पार्वती को बताया राम रामंति रामेति, रमे रामे मनोरमे । सहस्त्रनाम तत्तुल्यम, राम नाम वरानमे ॥ राम नाम निज तत्व है, सभी ग्रंथ मंझार । राम चरण में क्या कहूं,कोई पंडित लियो विचार ॥ इसी "राम नाम महामंत्र" शब्द का सुमिरन श्री रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा की साधना का मूल है । रसना, हृदय, नाभि से होते हुए दसवें द्वार (सहस्त्रासार) जहाँ परब्रम्हा" राम" का वास है,से अरस परस होना साधना की चरम सिद्धि है । चौकी भजन प्रताप की संत कह गए चार | रसना हिर्दय मध्य कमल,चौथी दसवें द्वार ॥ --------------------------------------------------------------------------------------------------- महाराज श्री के सम्पूर्ण भजनो की पेन ड्राइव के लिए संपर्क करे Jeenu Entertainment & Media / @haridarshan365 MO.9893471746 --------------------------------------------------------------------------------------------------- जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा • जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा II Jha le ch... आरती आप हो गुरुदेव दिनपति • आरती आप हो गुरुदेव दिनपति । संत श्री दिग्व... मेरे सर पर रख दो गुरुवर अपने दोनों हाथ • मेरे सर पर रख दो गुरुवर अपने दोनों हाथ ||... निज मंदिर के माय म्हारी मीरा नाचे रे • निज मंदिर के माय म्हारी मीरा नाचे रे ||संत...