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भाइयों और बहनों... क्या आपने कभी सोचा है कि इस संसार में कोई ऐसा भी मंत्र हो सकता है... जो देवी माँ ने स्वयं अपने हाथों से रचा हो? एक ऐसा दिव्य अस्त्र... जो युद्ध के मैदान में प्रकट हुआ... और जिसने महारोगास्त्र जैसे भयानक शस्त्र को पलभर में जलाकर राख कर दिया? जी हाँ भाइयों... आज मैं आपको उसी अद्भुत मंत्र के बारे में बताने जा रहा हूँ। मंत्र तंत्र यंत्र चैनल में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। भाइयों और बहनों... जब देवलोक और असुरलोक के बीच भीषण संग्राम हुआ था... जब माँ ललिता त्रिपुरा महासुंदरी और दुष्ट भंडासुर के बीच युद्ध अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था... उस समय जब भंडासुर ने देखा कि उसकी पराजय निश्चित है... तो उसने अपना सबसे घातक और भयानक अस्त्र छोड़ा। वह था — महारोगास्त्र! एक ऐसा अस्त्र जो पूरी सृष्टि में असाध्य और भयंकर रोग फैला सकता था। जिसके सामने देवता भी काँप उठते थे। लेकिन भाइयों... माँ त्रिपुरा सुंदरी तो जगत जननी हैं। वे भला अपनी संतानों को कष्ट में कैसे देख सकती थीं? उसी क्षण — माँ ने भगवान विष्णु के तीन परम पवित्र और दिव्य नामों को एकत्र कर एक महाशक्तिशाली अस्त्र का निर्माण किया। और देखते ही देखते — भंडासुर का वह भयानक महारोगास्त्र जलकर भस्म हो गया। उसी दिन से — उसी पवित्र क्षण से — इन तीन नामों को सनातन धर्म में नामत्रय अस्त्र मंत्र कहा जाने लगा। और तब से लेकर आज तक यह मंत्र हर असाध्य रोग को नष्ट करने में अचूक और प्रभावशाली माना जाता है। भाइयों और बहनों... शास्त्रों में लिखा है कि भगवान विष्णु के इन तीन नामों में वह शक्ति है... जो पूरे विष्णु सहस्रनाम के समान फल देती है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो... किडनी की गंभीर समस्या हो... पैरालाइसिस हो... या फिर कोई भी ऐसा रोग जिसे डॉक्टरों ने भी असाध्य कह दिया हो... इस नामत्रय अस्त्र मंत्र के नियमित श्रवण और जाप से — उस रोग का संकट भी टलने लगता है। यह मेरी नहीं... यह हमारे शास्त्रों की वाणी है। यह हमारे ऋषि-मुनियों का अनुभव है। अब मैं आपको बताता हूँ कि इस मंत्र का लाभ कैसे उठाएं... यदि आप स्वयं स्वस्थ हैं और जाप करने में सक्षम हैं — तो प्रतिदिन प्रातःकाल या सायंकाल शांत चित्त से बैठकर कम से कम 108 बार इन तीन दिव्य नामों का जाप करें। और यदि आप स्वयं जाप नहीं कर सकते — तो घबराइए नहीं। केवल इस वीडियो को प्रतिदिन दस से पंद्रह मिनट तक श्रद्धापूर्वक सुनें। शास्त्र कहते हैं — श्रवण मात्र से भी वही पुण्य और वही लाभ प्राप्त होता है जो जाप से होता है। और यदि आपके घर में कोई इतना अस्वस्थ है कि वे बोल नहीं सकते... उठ नहीं सकते... तो परिवार का कोई सदस्य उनके पास — उनके सिरहाने बैठकर — यह मंत्र सुनाए। उनके कानों तक यह दिव्य नाम पहुँचना ही उनके लिए सबसे बड़ी औषधि है। भाइयों और बहनों... यह मंत्र मैंने आप सभी की रोगमुक्ति की कामना लेकर — पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ जप कर आप तक पहुँचाया है। भगवान अच्युत — जो कभी किसी को नहीं छोड़ते — वे आपकी और आपके परिवार की रक्षा अवश्य करेंगे। बस एक निवेदन है आपसे... यह वीडियो उन सभी लोगों तक पहुँचाएं जो किसी रोग से पीड़ित हैं। हो सकता है आपका यह एक शेयर किसी के जीवन में नई रोशनी ले आए। चैनल को सब्सक्राइब करें। बेल आइकन दबाएं। यही आपकी सच्ची गुरुदक्षिणा होगी। नामत्रय मंत्र:- ॐ अच्युताय नमः ॐ अनंताय नमः ॐ गोविंदाय नमः