У нас вы можете посмотреть бесплатно समर्पण का जादू I तानसेन ने अकबर को क्यों कहा “मैं कुछ भी नहीं हूँ " I Akbar- Birbal Hindi Stories или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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मुगल सम्राट अकबर को तानसेन का संगीत इतना पसंद था कि वे उन्हें विश्व का सबसे महान संगीतकार मानते थे। लेकिन एक दिन तानसेन ने खुद कहा – “महाराज, मेरे पूज्य गुरु स्वामी हरिदास के सामने मेरा संगीत कुछ भी नहीं है।” अकबर को यकीन नहीं हुआ। वे तानसेन के साथ छिपकर स्वामी हरिदास का राग सुनने पहुंच गए… और फिर जो हुआ, उसने अकबर की आँखों में आंसू ला दिए। यह कहानी सिर्फ संगीत की नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और समर्पण की शक्ति की है। जब इंसान अपनी प्रतिभा को सिर्फ ईश्वर और अपनी लगन के लिए न्योछावर कर देता है, तो उसका जादू दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। तानसेन ने अकबर को यही सिखाया – “दरबार की जी-हजूरी में गाया गया संगीत और भक्ति में डूबकर गाया गया संगीत… दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है।” आज के दौर में भी यही बात लागू होती है। अगर आपमें कोई प्रतिभा है, तो सम्मान और पैसा मत पीछे दौड़ाओ। उस प्रतिभा में पूरी तरह डूब जाओ, उसकी भक्ति करो… सम्मान और सफलता खुद आपके पीछे आएंगे। ❤️ अगर यह कहानी आपको छू गई हो तो Like करो, Comment में “समर्पण” लिखो और Share जरूर करो। 🔔 Subscribe कर लो ताकि ऐसी प्रेरणादायक कहानियां सबसे पहले आपको मिलें। #तानसेन #अकबर #स्वामीहरिदास #भक्ति #समर्पण #संगीत #मुगलकाल #प्रेरणादायककहानी #गुरुभक्ति #आध्यात्मिक #MotivationalStory #IndianHistory #Tansen #Akbar #devotionalvideo Disclaimer: The information and stories shared in this video are based on historical accounts and popular folklore. While we strive for accuracy, some creative liberties may be taken for storytelling purposes. This video is intended for educational and inspirational purposes only.