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गुप्त नवरात्रि के दौरान राम रचित कात्यायनी स्तोत्र और गौरीपति शतनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इनके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं: राम रचित कात्यायनी स्तोत्र (Ram Rachit Katyayani Stotra): विवाह में बाधा का निवारण: यह स्तोत्र विशेष रूप से विवाह में आ रही देरी या बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है। मनचाहा जीवनसाथी: ऐसी मान्यता है कि इसके नियमित पाठ से योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। सुखद वैवाहिक जीवन: विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख और शांति के लिए इसका पाठ करती हैं। गौरीपति शतनाम (Gauripati Shatnaam - भगवान शिव के 100 नाम): मनोकामना पूर्ति: भगवान शिव (गौरीपति) के 100 नामों का जाप करने से साधक की सभी सात्विक इच्छाएं पूरी होती हैं। ग्रह दोष शांति: गुप्त नवरात्रि में शिव स्तुति करने से राहु-केतु और शनि जैसे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। शक्ति और सुरक्षा: यह पाठ शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। आध्यात्मिक उन्नति: देवी शक्ति की साधना के साथ शिव स्तुति करने से शिव-शक्ति की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है, जो आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त करती है। महत्व: गुप्त नवरात्रि में की गई साधना गोपनीय और अधिक शक्तिशाली होती है। इन दोनों स्तोत्रों का पाठ करने से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।