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प्राचीन भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं क्यों था? (Prachin Bharat mein shiksha ka uddeshya keval naukri nahi kyon tha?) प्राचीन भारत में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास और समाज में नैतिकता और ज्ञान फैलाना था। शिक्षा से सिर्फ रोजगार ही नहीं मिलता था, बल्कि धर्म, नैतिकता, जीवन कौशल और समाज में योगदान देना भी सिखाया जाता था। विद्या का उद्देश्य आत्म-उन्नति और समाज के कल्याण को बढ़ावा देना था, न कि केवल पेशेवर काम के लिए तैयार करना। 💛 Support / Help WhatsApp: 9472673979 Email: chandanbusiness09@gmail.com 💬 Your Queries ❓ • प्राचीन भारत में शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे? • शिक्षा ने व्यक्ति के नैतिक और आध्यात्मिक विकास में कैसे मदद की? • शिक्षा और समाज सेवा का क्या संबंध था? • क्या प्राचीन शिक्षा में विज्ञान और कला का भी महत्व था? • शिक्षा का रोजगार से अलग उद्देश्य क्यों महत्वपूर्ण था? • गुरुकुल प्रणाली में शिक्षा का स्वरूप कैसा था? • शिक्षा से समाज में एकता और संस्कृति को कैसे बढ़ावा मिला? • शिक्षा और धर्म का क्या संबंध था? • आधुनिक शिक्षा और प्राचीन शिक्षा में उद्देश्य का अंतर क्या है? • शिक्षा ने बच्चों और युवाओं को समाज के लिए कैसे तैयार किया? 📱 Follow Us: 🔹 Instagram – / examtopperofficial 🔹 WhatsApp – https://whatsapp.com/channel/0029Vb6K... 🔹 Telegram – https://t.me/examtopper9 📢 Hashtags: #PrachinShiksha #EducationForLife #IndianHistory #GurukulSystem #StudyNotesHindi #ExamTopperLibrary #HistoryForKids #KnowledgeAndEthics #LifeSkillsEducation #SocietyAndEducation