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आलाप पध्दती

उत्पाद व्यय ध्रुव स्वभाव

द्रव्य गुण पर्याय स्वभाव

प्रमाण नय निक्षेप स्वभाव

प्रवचनसार

पंचास्तिकाय

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69

#jainphilosophy #jainology 69#समयव्याख्या१३८रहस्य👉👈[१]मध्यम भुमिका= ज्ञानी की यानी चतुर्थ गु से षष्ठम गु जीव की सविकल्प दशा की २ अवस्थाये, (१) पापरुप-निचलीदशा तथा (२)पुण्यरुप- मध्यम दशा & (३) शुद्धोपयोगरुप अवस्था= उपरितन दशा = आत्मोपलब्धि= चतुर्थ गु, पंचम गु, सप्तम गु की यथायोग्य उपरितन दशा। रहस्य?-पं.अनिलजी,पुणे। #गाथा सूत्र १२३ से १२४, पृष्ठ १८१ से १८४ #om#guru#jai#art#meditation#prayer#amaizing#jain #jainism#mrbeast#dravyaguna#afternoon PUBLISHED ON:FRIDAY-16/1/2026 निज निज नाना पर्यायेषु तदेव इदं इति द्रव्यस्य नित्यस्वभाव:।आ.प.११३,ये नित्यम द्रव्यम् आश्रित्य वर्तन्ते ते गुणा:। सर्वार्थसिद्धि तद् भाव अव्ययम् नित्यं। त.सू., ---निष्क्रियो पारिणामिक:।---समयसार ता.वृ.३२० 👇 IMP e-books pdf & All Charts pdf 👇 https://drive.google.com/drive/folder... #को न विमुह्यति शास्त्रसमुद्रे---इस युग के देश विदेश में ख्यातिप्राप्त विद्वान आ.डाॅ.श्री. हुकुमचंदजी भारील्लजी द्वारा उनके नयचक्र में --द्रव्यार्थिक & पर्यायार्थिक २ नय आगम के कहे गये है।, वह आगम के न होकर मुल २ नयों में से निश्चयनय(नय/प्रमाणवाक्य/प्रमाणसप्तभंगी) के उपभेद है। आगम आधार आलाप पद्धती आ.देवसेन & नयचक्र-आ.माईल्लधवलजी गा १८२-७। भव्य जीवों को यह यथायोग्य संकेत है।ॐ नम:। प्रमाणवाक्यमें 'एव'का प्रयोग होता ही नहीं" यह मान्यता कैसी गलत?रा.अ४सू४२वा 15-Pl ref Lecture No 111&112—OF “ADHYTMA NYAYDIPIKA-HINDI- https://youtube.com/live/BNBq3SPnrmA?... अवग्रह मतिज्ञान सम्यक् प्रमाण ज्ञान पर्याय होकर दर्शनोपयोग उपरांत निजशुद्धात्म प्रभु को स्पष्ट, संशय रहित जानति है। आगम प्रमाण आ.अमृतचंद्राचार्य की तत्वार्थसूत्र टीका।---- पर-अपर गुरुओं के माध्यम से प्राप्त हुआ सर्वज्ञ मत कौन से भव्य जीवों को मान्य नहीं होगा?-- अवश्य मान्य होगा ही--होगा।--ॐ नम:।--स्वयम सिद्ध अकृत्रिम नंदिश्वर स्वरुपोSहम्।जैनं जयतु शासनम्। पञ्चास्तिकाय संग्रह गाथा १६५ शब्दोंके अर्थ स्वसमय = सम्यग्दृष्टि परसमय = मिथ्यादृष्टि सूक्ष्मपरसमय = सूक्ष्ममिथ्यादृष्टि (देशनालब्धि प्रायोग्यलब्धि करणलब्धि मे स्थित जीव) स्थूलपरसमय = स्थूलमिथ्यादृष्टि ---नरनारकादिजीवविशेष,अजीव, पुण्य, पाप,संवर, निर्जरा,बन्ध,मोक्ष व्यावहारिक९तत्वोंसे मै टंकोत्कीर्ण एकज्ञायकस्वभावभाव द्वारा अत्यन्तभिन्नपणा होनेसे शुद्ध हूॅं---समयसार गा 38 आ.ख्या.टीका 👇 आगमाधार से प्रश्नोत्तर रुप संकलन पुस्तिका - "चार अभाव" pdf 👇 👇 IMP e-books pdf & All Charts 👇 https://drive.google.com/drive/folder... 👉प्रवचनसार गा.सुत्र १०६-- आ.अमृतचंद्रजी अतत् भाव की सिध्दि एक ही द्रव्य मे बताते हुए हेतु देते है ---कि प्रदेशभेद नहीं है। इससे भी अन्योन्याभाव की सिद्धि प्रत्येक द्रव्य में हो जाती है। 👆 Also pl ref Chart No 26 - ---को न विमुह्यति शास्त्र समुद्रे---शास्त्राधार से सुक्ष्म भुल में सुधार कर लेना ही सम्यग्दर्शन रुपी रत्न की संरक्षण करना है।----ॐ नम:। वस्तु स्वरुप समजने के लिए, द्रव्य गुण पर्यांय का स्वरुप अवश्य समझना चाहिए। सर्वप्रथम [१] द्रव्य-गुण- पर्याय स्वभाव/उत्पाद-व्यय-ध्रुव स्वभाव /प्रमाण- नय- निक्षेप स्वभाव [२] ६ द्रव्य, पंचास्तिकाय आदि ग्रंथ [३] समयसारादि अध्यात्मिक ग्रंथ यह क्रम माईल्ल धवल आचार्यादियों ने बताया है। यह जिनाज्ञा के पालन से निश्चित ही अभिष्ट सिद्धि अति शिघ्रता से मिलती ही है। समयसारादि सभी शास्त्र श्रावक के लिये ही है, किन्तु स्वाध्याय के ३ वर्ग के सेवन का ही राजमार्ग बताया गया है। ॐ नम:। 👇"हिन्दी प्रवचन _अत्यन्त २ महत्वके प्रमाण नय निक्षेपादि विषयपर"_प्रवक्ता प.पू.१०८श्री वीरसागरजी महाराज Link👇https://youtube.com/playlist?list= 👉 जैन सिद्धान्त प्रवेशिका प्रवचन_नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- महाराज श्री एवं माताजी द्वय Link👇   • #जैन सिद्धान्त प्रवेशिका#JAIN SIDHANT PRAV...   👉समयसार ४७ शक्ति आत्मख्याति प्रवचन Link👇   • #समयसार ४७ शक्ति#Samaysaar 47 Shakti-प.पु ...   👉न्यायदीपिका प्रवचन अध्याय १,२,३ -प्रवक्ता: प.पू.अपूर्व चैतन्य ऋद्धिधारी १०८ श्री वीरसागरजी महाराज प्रवचन Link👇   • #अध्यात्मन्यायदीपिका #AdhytmaNyaydipika   👉ध्यान लिंक👇# DhyanLink👇    • #ध्यान #Dhyan   👉आ.पं.श्री राजकुमारजी आळंदकर.लिंक# Link 👇    • आ.पं.श्री राजकुमारजी आळंदकर,सोलापूर   👉प्रवचनसार गाथा २४ -७.लिंक# Link 👇 #Pravachansaar Gatha 24 -76:    • #प्रवचनसार  & पंचास्तिकाय #Pravachansaar& ...   👉समयसार प्र. Link👇https://youtube.com/playlist?list= 👉आ.पं.श्री.अनिलजी दुरुगकर, पुणे:    • #आलाप पध्दती-(हिन्दी) आ.पं.श्री.अनिलजी दुर...   🦚 ASHTSAHASTRI:    • ASHTSAHASTRI   मुनिराज श्री के प्रवचनों में सरलतम भाषा में सूक्ष्म चर्चा तो है ही और अनेक बार अन्य ४ अनुयोगों के सन्दर्भ देकर ४ अनुयोगों का मिलान करके दिखाने से विषय अतिस्पष्ट हो जाता है। धन्यवाद।ॐ नम:।

Comments
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