У нас вы можете посмотреть бесплатно संगमेश्वर महादेव मंदिर कुरुक्षेत्र। Sangmeshwar Mahadev Temple Pehowa। शिव मंदिर। 4K। दर्शन 🙏 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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हर हर महादेव !!! आप सभी का हमारे लोकप्रिय कार्यक्रम दर्शन में हार्दिक अभिनंदन. आज हम आपको अपने कार्यक्रम के माध्यम से भगवान शिव के एक अति प्राचीन और स्वयंभू प्रकट लिंग विराजित मंदिर के दर्शन करवाने जा रहे हैं, तो आइये दर्शन करते हैं श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर के। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पिहोवा तहसील से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर अरुणाय गांव में स्थित है श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर” यह भगवान शिव को समर्पित बहुत ही प्राचीन और दिव्य मंदिर है, मंदिर से सम्बंधित इतिहास के अनुसार कई वर्षों पूर्व यहाँ पास में ही एक सिद्ध महात्मा श्री गणेश गिरी जी महाराज तप किया करते थे एक समय उनके स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए और उन्हें एक बांबी दिखाते हुए कहा कि इसकी खुदाई करो मैं यहां स्वयंभू रूप में प्रकट हूं, अगले दिन बाबा कुछ चरवाहों के साथ उस स्थान पर गए और बांबी की खुदाई की और वहां से भगवान शिव का एक अति दिव्य शिवलिंग के दर्शन हुए. शिवलिंग को बाहर निकालने के लिए 13 दिन तक खुदाई चलती रही पर शिवलिंग का कोई अंत नहीं मिला , तब एक रात भगवान् शिव बाबा श्री गणेश गिरी के सपने में आये और खुदाई रोकने के लिए कहा और कहा की मेरा कोई अंत नहीं है अतः यहीं मंदिर का निर्माण कराओ. तब इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया. इससे पूर्व की मंदिर से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार, कहा जाता है कि सरस्वती नदी के किनारे पर यहां विश्वामित्र और वशिष्ठ जी तप किया करते थे, विश्वामित्र जी वशिष्ठ जी को अपना विरोधी मानते थे, उन्होंने एक बार सरस्वती जी को प्रसन्न कर कहा कि तुम वशिष्ठ जी की कुटिया को अपने पानी के वेग से बहा ले जाओ ताकि वह यहां से चले जाएं और यहां केवल हम रहे परंतु सरस्वती जी ने ऐसा नहीं किया तब विश्वामित्र ने सरस्वती को श्राप दिया जिससे उनका जल रक्त के सामान हो गया और उन्हें रक्त वाहिनी कहने लगे. रक्त के समान जल होने से यहां पर राक्षसों का वर्चस्व हो गया जो ऋषि मुनियों के यज्ञ को ध्वस्त करने लगे, जब ऋषियों की पीड़ा बढ़ी तो उन्होंने भगवान शिव की आराधना की, भगवान शिव प्रसन्न हुए तथा सरस्वती जी को शाप मुक्त किया. और फिर राक्षसों का मिटना संभव हुआ. इस प्रकार भगवान शिव ऋषियों को आशीर्वाद देकर वहीं पर शिवलिंग रूप में उपस्थित हो गए, जो आज संगमेश्वर महादेव नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर तीन नदियों अरुणा, वरुणा और सरस्वती जी का संगम होने के कारण इनको संगमेश्वर महादेव कहा जाता है। Disclaimer: यहाँ मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहाँ यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #hinduism #temple sangameshwarmahadev #bholenath #tilak