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श्रीराम लक्ष्मण को मेघनाद ने नागपाश में बाँध लिया.. तब रामादल में निराशा छा गयी थी.. रावण ने यह संदेश सीता को भेजवा दिया.. और त्रिजटा से कहा कि पुष्पक विमान पर बैठा कर सीता को रणभूमि में ले जाओ और आकाश से ही रामदल और राम लक्ष्मण को पड़े हुए... दिखा ले आओ.. तब जब सीता जी ने उन्हें पड़ा देखा.. विलाप करने लगीं और हताश हो गयीं.. श्रीराम को चेत नहीं था.. लक्ष्मण जी ज्यादा ही थकित और बेसुध बँधे हुए जमीन पर पड़े थे.. रामादल द्विविधा में पड़ा था... परन्तु सुग्रीव ने सेना को मनोबल देकर रोक रखा था.. विभीषण जी भी निराश हो चुके थे.. परन्तु हिम्मत नहीं हारे थे... सीता जी यह दृष्य देख कर रोती और विलाप करती थीं - त्रिजटा ने रहस्यात्मक बाते बता कर ढाढस बँधाया - और सीताजी को पुनः अशोक वाटिका ले गयी.. जब श्रीराम को बहुत देर बाद होश आयी (चेतना लौटी ) तब वे अपने को बंधन के अधीन - निःसहाय पाये - और लक्ष्मण जी को सुध भी नहीं आयी थी अतः निराश होकर रोने लगे.. तथा सुग्रीव से कहे कि आप लोग वापस अपने राज्य लौट जाओ.. विभीषण को जो मैं वचन दिया वह भी अब पूर्ण नहीं कर पाऊँगा (ऐसा लगता है ) क्योंकि लक्ष्मण चेतनाहीन हो गये हैं.. अब मैं अयोध्या नहीं लौट पाऊँगा... ऐसा कह चुके थे फिर भी विभीषण और अंगद उन्हें छोड़े नहीं.. रोते रह गये... ऐसे में एक व्यक्ति आया... जो विनिता नन्दन महाभाग हैं... उन्होंने ने आश्चर्यजनक उत्साह वर्धक कार्य किया जिससे रामादल में पुनः उत्साह भर गया तथा राम लक्ष्मण को उन्होंने सचेत किया तथा बन्धन से मुक्त किया... वे वीर कौन हैं ? श्रीराम ने उनसे यह पूँछा.. यह विचित्र सनसनी खेज कथा अवश्य सुनिये यहाँ इस वीडियो में...🙏🏻🌹💐🙏🏻