У нас вы можете посмотреть бесплатно NEEL SARSWATI STOTRA नील सरस्वती स्तोत्र (श्री शिवदत्त स्मारक गड्डी, जोधपुर) 9414849604 , 9829335510 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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अथ नीलसरस्वतीस्तोत्रम् -- घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि । भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥ १ ॥ ॐ सुराऽसुरार्चिते चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते । जाड्य पापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥२॥ जटाजूटसमायुक्ते . लोलजिह्वान्तकारिणि । द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥ ३ || सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते । सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥ ४ ॥ जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला । मूढतां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥ ५ ॥ वं ह्र हू कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः । उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥ ६ ॥ बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे । मूढत्वं च हरेद् देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥ ७ ॥ इन्द्रादि विलसद् द्वन्द्ववन्दिते करुणामयि। तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम्॥८॥ अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां यः पठेन्नरः।षण्मासैःसिद्धिमाप्नोति नाsत्र कार्या विचारणा ९ मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।विद्यार्थी लभते विद्यां तर्कव्याकरणादिकम् १० इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाऽन्वितः । तस्य शत्रुः क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते ॥ ११ ॥ पीडायां वाऽपि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये । य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशयः । इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनिमुद्रां प्रदर्शयेत् ॥ १२ ॥ ॥ इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं समाप्तम् ॥ नीलसरस्वती स्तोत्र माँ श्री सरस्वती जी को समर्पित हैं | नीलसरस्वती स्तोत्र का पाठ आप नियमित रूप से माँ सरस्वती देवी की पूजा करने में भी कर सकते हैं ! नीलसरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से बच्चों का दिमाग़ तेज, पढ़ने में होशिहार, सभी कलाओं में विद्वान, स्मरण शक्ति तेज़ होना आदि फ़ायदे होते हैं ! विद्या व धन प्राप्ति मोक्ष प्राप्ति कामना अनुसार प्रतिदिन पाठ कर्ता के अभीष्ट को सिद्ध करने वाला साधक के शत्रु का अनायस क्षय हो जाता है |