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🙏 श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् का यह दिव्य पाठ माता लक्ष्मी और भगवान नारायण की संयुक्त आराधना है। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है। इस पवित्र स्तोत्र के नियमित पाठ से दारिद्र्य का नाश, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से इसका पाठ करता है, उसे ऐहिक (इस लोक) और पारलौकिक (परलोक) दोनों प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। ✨ लाभ: • आर्थिक स्थिरता और धन वृद्धि • नकारात्मक ऊर्जा का नाश • वैवाहिक सुख और परिवार में प्रेम • मन की शांति और आध्यात्मिक शक्ति • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा 📿 आप इस स्तोत्र को प्रतिदिन प्रातः या सायं काल सुनें और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करें। 🔔 यदि आपको यह भक्ति पाठ पसंद आए तो Like, Share और Subscribe अवश्य करें। जय लक्ष्मी नारायण 🙏 Lakshmi Narayana स्तोत्रम् (पाठ) ध्यानम् चक्रं विद्या वर घट गदा दर्पणं पद्मयुग्मं दोर्भिर्बिभ्रत्सुरुचिरतनुं मेघविद्युन्निभाभम् । गाढोत्कण्ठं विवशमनिशं पुण्डरीकाक्षलक्ष्म्यो रेकीभूतं वपुरवतु वः पीतकौशेयकान्तम् ॥ १ ॥ शंखचक्रगदापद्मकुंभादर्शाब्जपुस्तकम् । बिभ्रतं मेघचपलवर्णं लक्ष्मीहरिं भजे ॥ २ ॥ विद्युत्प्रभाश्लिष्टघनोपमानौ शुद्धाशयेबिंबितसुप्रकाशौ । चित्ते चिदाभौ कलयामि लक्ष्मी- नारायणौ सत्त्वगुणप्रधानौ ॥ ३ ॥ लोकोद्भवस्थेमलयेश्वराभ्यां शोकोरुदीनस्थितिनाशकाभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ४ ॥ सम्पत्सुखानन्दविधायकाभ्यां भक्तावनानारतदीक्षिताभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ५ ॥ दृष्ट्वोपकारे गुरुतां च पञ्च- विंशावतारान् सरसं दधत्भ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ६ ॥ क्षीराम्बुराश्यादिविराट्भवाभ्यां नारं सदा पालयितुं पराभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ७ ॥ दारिद्र्यदुःखस्थितिदारकाभ्यां दयैव दूरीकृतदुर्गतिभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ८ ॥ भक्तव्रजाघौघविदारकाभ्यां स्वीयाशयोद्धूतरजस्तमोभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ९ ॥ रक्तोत्पलाभ्राभवपुर्धराभ्यां पद्मारिशंखाब्जगदाधराभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ १० ॥ अङ्घ्रिद्वयाभ्यर्चककल्पकाभ्यां मोक्षप्रदप्राक्तनदंपतीभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ११ ॥ इदं तु यः पठेत् स्तोत्रं लक्ष्मीनारायणाष्टकम् । ऐहिकामुष्मिकसुखं भुक्त्वा स लभतेऽमृतम् ॥ १२ ॥ ।। इति श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् संपूर्णम् ।। #LakshmiNarayana #LakshmiNarayanStotram #लक्ष्मीनारायण #VishnuBhakti #LakshmiMata #BhaktiShorts #HinduDevotional #MorningMantra #ProsperityMantra #SanatanDharma #DivineBlessings #DailyPrayer #SpiritualShorts #BhajanStatus