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बिहार के अरवल में नवरात्रि का महोत्सव एक भव्य और धार्मिक आयोजन है, जो देवी दुर्गा की आराधना और पूजा के लिए मनाया जाता है। इस महोत्सव में, अरवल के लोग बड़े ही उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और विभिन्न रूपों में उनकी आराधना करते हैं। इस आयोजन में स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं और देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नवरात्रि का महोत्सव अरवल की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यहां के लोगों को एकता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। इस वीडियो में, हम आपको अरवल में नवरात्रि के महोत्सव की झलक दिखाएंगे और आपको इस आयोजन की महत्ता और भव्यता के बारे में Navratri in Arwal, Bihar, is a grand and religious festival dedicated to the worship of Goddess Durga. Locals and people from surrounding areas participate with great enthusiasm and devotion, worshipping Goddess Durga in her various forms for nine days. The festival is a significant part of Arwal's culture and tradition, fostering unity and spiritual strength among its people. The provided text, likely from a video description, aims to showcase glimpses of the Navratri festival in Arwal and highlight its importance and grandeur. दशहरा या विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और यह त्योहार भगवान राम के रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दशमी के दिन आता है. इस दिन, लोग रावण दहन करते हैं और अपने अंदर के अहंकार, लोभ और क्रोध जैसे विकारों को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं. इसके अलावा, यह देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का भी प्रतीक है. क्यों मनाया जाता है दशहरा? भगवान राम की रावण पर विजय: रामायण के अनुसार, भगवान राम ने 14 वर्षों के वनवास के बाद रावण का वध किया था. यह जीत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय: एक अन्य मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर नामक असुर का वध किया था, जो देवताओं को परेशान कर रहा था. यह भी अच्छाई की जीत का प्रतीक है. आत्म-सुधार का संदेश: रावण दहन के माध्यम से, दशहरा हमें अपने अंदर के नकारात्मक विचारों, क्रोध, लोभ और अहंकार को समाप्त करने के लिए प्रेरित करता है. पांडवों की विजय: कुछ कथाओं के अनुसार, इसी दिन पांडवों ने अपने वनवास के बाद अपने हथियार शमी के पेड़ से निकाल कर कौरवों पर आक्रमण किया और विजय प्राप्त की थी. कैसे मनाया जाता है दशहरा? रावण दहन: इस दिन बड़े पैमाने पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. रामलीला: रामलीला का मंचन किया जाता है, जिसमें भगवान राम और रावण के युद्ध का चित्रण होता है. शमी पूजन: लोग शमी के पेड़ का पूजन करते हैं और 'सोना पत्ती' बांटते हैं, जो समृद्धि और विजय का प्रतीक है. दुर्गा विसर्जन: देवी दुर्गा की मूर्तियों को विसर्जित किया जाता है, जो नवरात्रि के समापन का भी प्रतीक है नवरात्रि देवी दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर पर विजय का प्रतीक है, जो "अच्छाई पर बुराई की जीत" का प्रतिनिधित्व करता है। इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो जीवन में शुद्धिकरण, सकारात्मकता और सदाचार अपनाने का संदेश देती है। यह पर्व आध्यात्मिक यात्रा, प्रकृति और चंद्रमा से जुड़े परिवर्तनों को भी दर्शाता है, जिससे मन और शरीर को नयापन मिलता है। धार्मिक कारण महिषासुर का वध: सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, महिषासुर नामक एक राक्षस देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार कर रहा था। देवी दुर्गा ने नौ रातों तक युद्ध करके उसका वध किया और दशहरा (विजयादशमी) के दिन जीत हासिल की। देवी के नौ रूप: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। राम और रावण की कथा: उत्तर भारत में, नवरात्रि का संबंध भगवान राम की रावण पर विजय से भी है, जिसे विजयादशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाकर मनाया जाता है, जो अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक है। आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कारण आंतरिक शुद्धि: नवरात्रि नौ दिन और रातें मन और शरीर को शुद्ध करने का एक अवसर है। यह लोगों को जीवन में उचित और पवित्र कार्य करने और सदाचार अपनाने के लिए प्रेरित करता है। बुराई पर अच्छाई की विजय: यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जो लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक दिशा में कार्य करने और समाज में सद्भाव लाने के लिए प्रोत्साहित करता है। नारी शक्ति का सम्मान: यह पर्व समाज में नारी के महत्व को प्रदर्शित करता है और मातृदिव्यता यानी पवित्र चेतना का उत्सव है, जो सभी रूपों में व्याप्त है। प्राकृतिक और खगोलीय कारण मौसम परिवर्तन: नवरात्रि हमेशा मौसम के बदलाव के समय आता है, जब शरीर और मन संवेदनशील होते हैं। चंद्रमा का चक्र: नौ दिन चंद्रमा के एक चक्र को भी दर्शाते हैं, जो अमावस्या से नवमी तक चलता है। यह एक नए मौसम के अनुसार शरीर और मन को ढालने का समय