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ओम शांति 1. 04:00 AM – 05:15 AM | मुरली लाइव (01-09-2025) 2. 06:00 AM – 07:15 AM | मुरली लाइव (31-08-2025) 3. 04:00 PM – 06:15 PM | अव्यक्त मुरली रिवाइज (05-04-1983) प्रश्नोत्तर लाइव 4. 08:00 PM – 09:15 PM | प्रश्नोत्तर लाइव जब हम स्ट्रीम पर लाइव होंगे तो आप प्रश्न पूछ सकते हैं आप इस मुरली को बड़े बड़े शब्दों पड़ना, लाइव सुनना और मन्थन करना चाहते हैं तो नीचे गूगल मीट का लिंक दिया हुआ है आप इस पर जुड़ सकते हैं हम मुरली मंथन चार बार (प्रातः4:00और 6:00शाम को4:00 और 8:00) करते हैं करते हैं चारों समय के लिए एक ही लिंक रहता है जो नीचे दिया जा रहा है https://meet.google.com/eoj-xpsz-nch यूट्यूब लाइव जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें https://brahmakumarisbkomshanti.com/b... डिस्क्लेमर (Disclaimer):यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की साकार मुरली एवं ईश्वरीय ज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, व्यक्ति या मान्यता की आलोचना करना नहीं है। यह प्रस्तुति आत्म-चिंतन, आत्म-उत्थान और ईश्वरीय दृष्टि से ज्ञान को समझने हेतु है। दर्शक इसे तुलना नहीं, बल्कि स्वयं के जीवन में धारणा के रूप में ग्रहण करें। मीठे बच्चे – बाप तुम्हें जो पढ़ाई पढ़ाते हैं वह बुद्धि में रख सबको पढ़ानी है…” इस वीडियो में हम साकार मुरली के आधार पर गहराई से समझते हैं— 🔹 आत्मा सतयुग में कर्म करते हुए भी पाप से मुक्त क्यों रहती है? 🔹 कलियुग में वही कर्म विकर्म कैसे बन जाते हैं? 🔹 संगमयुग का विशेष महत्व क्या है? 🔹 बाप का परिचय और सृष्टि चक्र समझाना क्यों पहली सेवा है? 🔹 कर्म, अकर्म और विकर्म की गुह्य गति क्या है? बाबा स्पष्ट करते हैं कि सतयुग में रावण नहीं होने से हर कर्म अकर्म बन जाता है, और कलियुग में विकारों के कारण वही कर्म विकर्म बन जाते हैं। यह ज्ञान केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि बुद्धि में धारण कर दूसरों को समझाने के लिए है। मुख्य बिंदु: ✔ हम सब आत्मा रूप में भाई-भाई हैं ✔ बाप ही पतितों को पावन बनाने वाला है ✔ सृष्टि चक्र 5000 वर्ष का एक्यूरेट चक्र है ✔ संगमयुग ही परिवर्तन का युग है अंत में धारणा वरदान स्लोगन अव्यक्त इशारे के माध्यम से जीवन में प्रयोग की विधि भी समझाई गई है। ईश्वरीयज्ञान, साकारमुरली, मीठेबच्चे, आत्मापार्ट, कर्मअकर्मविकर्म, सतयुग, कलियुग, संगमयुग, सृष्टिचक्र, बापकापरिचय, आध्यात्मिकज्ञान, राजयोग, आत्माकल्याण, ब्रह्माकुमारी, ओमशांति,