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बाइट जुल्फिकार पठान सदर कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी धार।।प्रति शुक्रवार को भोजशाला में आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के आदेश के अनुसार मुस्लिम समाज के द्वारा आज नमाज अदा की गई नमाज अदा कर कर शांतिपूर्ण तरीके से मुस्लिम समाज के लोग बाहर निकले। मीडिया के द्वारा मुस्लिम समाज के सदर कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान से 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को नमाज़ पढ़े जाने को लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि शहर में शांति व्यवस्था है और आगे भी बनी रहेगी और जुम्मे की नमाज मुस्लिम समाज का संविधानिक अधिकार है यह कमाल मौला मस्जिद है और कमांल मौला मस्जिद ही रहेगी वही जुल्फिकार पठान ने कहा कि शांति समिति की मीटिंग में कलेक्टर और एसपी ने यह कहा है कि केंद्र का एक आदेश आना बाकी है और जो आदेश आएगा उसका निश्चित रूप से पालन किया जाएगा मुस्लिम समाज शहर की शांति के लिए पूरा सहयोग कर रहा है। वहीं अब आपको बता दे की 23 जनवरी 2026 के दिन शुक्रवार भी है और बसंत पंचमी भी है क्योंकि 2003 के आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के आदेश के अनुसार हिंदुओं को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने का अधिकार है वही प्रति मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार है प्रति शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज कर अदा करने का अधिकार है और जब शुक्रवार और बसंत पंचमी एक दिन आते हैं तो विवाद की स्थिति बनती है जहां हिंदू समाज अखंड पूजा को लेकर लगातार जन अभियान चला रहा है लगातार हर मंगलवार को संतों का आगमन भोजशाला में हो रहा है वही अब मुस्लिम समाज भी अपने संवैधानिक अधिकार की बात कहते नजर आ रहा है। वही मुस्लिम समाज शांति और भाईचारे की बात भी कह रहा है लेकिन अब गेंद केंद्र के पाले में है। शासन प्रशासन भी केंद्र के आने वाले आदेश का इंतजार कर रहा हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया क्या कोई ऐसा आदेश निकालने वाला है जिससे की धार शहर में शांति और सौहाद्र की स्थिति बनी रह सके। क्या कहा जुलफ़िकार पठान: आज हम नमाज अदा करके अभी बाहर निकले हैं। शहर में शांति व्यवस्था बनी है और आगे भी शांति व्यवस्था बनी रहेगी। सवाल शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए मुस्लिम समाज ऐसा कुछ कर सकता है कि हम एक दिन नमाज और कहीं पढ़ लेंगे? ऐसा शहर शांति के लिए कर नहीं सकता है क्या? जवाब जुलफ़िकार पठान देखिए, मैं एक बात बता दूँ, जुमे की जो नमाज है, वो मुस्लिम समाज का एक संवैधानिक अधिकार है। 1935 में भी इस चीज़ को कंटिन्यू रखा गया कि ‘दिस इज़ अ कमाल मौला मस्जिद’। ये कमाल मौला मस्जिद है और आइंदा भी कमाल मौला मस्जिद रहेगी। जैसे इसमें आज नमाज होती है, वैसे ही आइंदा भी नमाज होती रहेगी। 1952 में भी इसी चीज़ को कंटिन्यू रखा। 07/04/2003 का जो आदेश है आर्कियोलॉजिकल सर्वे का, उसमें भी ये है कि जो जुमे की नमाज है, वो होती है। सवाल पर क्या मुस्लिम समाज एक शहर के हित में निर्णय नहीं ले सकता है क्या? जवाब जुलफ़िकार पठान: अभी शांति समिति की मीटिंग हुई थी, उसमें कलेक्टर साहब और एसपी साहब ने ये बोला है कि जो भी अभी केंद्र का एक आदेश आना बाकी है, जो आदेश आएगा उसका निश्चित पालन होगा। सवाल साहब, शहर की शांति और सौहार्द ज़्यादा महत्वपूर्ण है या परंपरा महत्वपूर्ण है? जवाब जुलफ़िकार पठान देखिए, जो परंपरा है, वो भी अपने आप में एक मायने रखती है। बाक़ी शहर की शांति के लिए मुस्लिम समाज पूरा जो है सहयोग कर रहा है और आगे भी सहयोग करेगा। सवाल साल में एक बार आप कर सकते हैं क्या त्याग? कि चलो ठीक है, पूजा हो जाए और हमारी तो हर जुमे नमाज हो ही रही है। इस बारे में पूरे समाज का क्या कहना है? जुलफ़िकार पठान ये आपने अच्छा प्रश्न पूछा। शहर की शांति के लिए मुस्लिम समाज अपना त्याग करने को तैयार है। बाक़ी जो मुस्लिम समाज जिस तादाद में अभी नमाज पढ़ता है, आप देख ही रहे हैं... थोड़ी सी तादाद हम कम कर सकते हैं और शहर की शांति के लिए हम तादाद कम कर सकते हैं। सवाल और कहीं नमाज पढ़ने पर बात नहीं हो सकती कि हम किसी अन्य मस्जिदों में नमाज पढ़ लें? जुलफ़िकार पठान: देखिए, मुस्लिम समाज का एक संवैधानिक अधिकार है। इस मस्जिद को हम कमाल मौला मस्जिद ही समझते हैं और जुमे की जो नमाज है वो कमाल मौला मस्जिद में ही होती है। रिपोर्टर: पूजा भी तो एक संवैधानिक अधिकार है? क्या इस पर निर्णय ले सकता है समाज? जवाब जुलफ़िकार पठान: देखिए, पिछले 800 साल से यहाँ पर कंटिन्यू नमाज होती आ रही है और कभी भी इस नमाज में कोई विघ्न नहीं आया। हम भी शांति व्यवस्था चाहते हैं और हम यही चाहते हैं कि शहर में शांति बनी रहे। मुस्लिम समाज भी शांति व्यवस्था में बिल्कुल बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगा। ये शहर हमारा है और यहाँ शांति बनी रहेगी। सवाल क्या देश भर में आप कौमी एकता की मिसाल पेश करेंगे? क्या भाईचारे का संदेश देंगे? देश जानना चाहेगा कि क्या कौमी एकता की मिसाल पेश होगी धार में? जवाब जुलफ़िकार पठान: कौमी एकता की मिसाल जब होगी जब यहाँ पर दोनों आयोजन होंगे। आपने देखा है 2006, 2013, 2016 में भी यहाँ नमाज हुई है और बहुत शांतिपूर्वक नमाज हुई है। और अभी भी नमाज होगी। सवाल शहर ने बहुत कुछ सहा है उन दिनों में, क्या इस बार शांति व्यवस्था बहाल कर पाएँगे? जवाब जुलफ़िकार पठान: बिल्कुल, शांति व्यवस्था के लिए सब प्रयासरत हैं। हमारी पुलिस भी, जगह-जगह मीटिंग हो रही है और सब कुछ शांति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुस्लिम समाज भी यहाँ पर शांति के लिए लगा हुआ है और 100% शांति रहेगी। अब जो आदेश आएगा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का, उसी का पालन होगा। बिल्कुल निश्चित रूप से पालन होगा और शांति व्यवस्था बनी रहेगी। जुलफ़िकार पठान, सदर, कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी, धार