У нас вы можете посмотреть бесплатно कृष्णा भगवान ने बकासुर को मार गिराया और उसके कर्मों की सजा दी 🚩 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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कृष्ण भगवान ने अपने साथी और गांव वाले की रक्षा की वृंदावन की पवित्र और हरी-भरी भूमि पर एक दिन बाल रूप में स्वयं भगवान कृष्ण अपने प्रिय सखा ग्वालबालों और गायों के साथ वन में चराने गए थे, यमुना जी की ठंडी हवा बह रही थी, पेड़ों पर पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे और कृष्ण अपनी बांसुरी बजाते हुए सबको आनंदित कर रहे थे, ग्वालबाल कभी दौड़ते, कभी खेलते, कभी कृष्ण के पास आकर हँसते, तभी अचानक उन्हें एक बहुत ही विशाल और विचित्र बगुला दिखाई दिया जिसका शरीर पहाड़ जैसा ऊँचा, आँखें अंगारों की तरह लाल और चोंच तलवार से भी अधिक तेज थी, वह कोई साधारण पक्षी नहीं बल्कि कंस द्वारा भेजा गया भयानक राक्षस बकासुर था जो कृष्ण का वध करने के लिए आया था, ग्वालबाल उसे देखकर डर गए और कृष्ण के पीछे छिप गए, पर कृष्ण शांत खड़े मुस्कुरा रहे थे जैसे उन्हें सब ज्ञात हो, तभी बकासुर ने बिना देर किए अपनी विशाल चोंच खोली और बिजली की गति से कृष्ण को निगल लिया, यह देखकर ग्वालबाल रोने लगे और गायें व्याकुल होकर रंभाने लगीं, पूरा वन शोक से भर गया, लेकिन बकासुर को क्या पता था कि उसने स्वयं परमात्मा को निगल लिया है, जैसे ही कृष्ण उसके गले के भीतर पहुँचे उनका दिव्य तेज सूर्य के समान फैल गया जिससे बकासुर का गला जलने लगा, उसकी आँखें बाहर निकलने लगीं और वह पीड़ा से तड़प उठा, तुरंत उसने कृष्ण को बाहर उगल दिया, कृष्ण बाहर आकर बिल्कुल शांत खड़े रहे, अब बकासुर क्रोध से पागल हो गया और अपनी तेज चोंच से कृष्ण पर प्रहार करने दौड़ा, उसके पंखों के फड़फड़ाने से तेज हवा चली, पेड़ हिलने लगे और धूल आकाश में भर गई, ग्वालबाल दूर खड़े भय से यह दृश्य देख रहे थे, तभी कृष्ण ने झट से उसकी दोनों चोंच पकड़ ली, बकासुर छूटने के लिए पूरी शक्ति लगाने लगा, कभी ऊपर उड़ने की कोशिश करता, कभी पंखों से वार करता, पर कृष्ण अडिग रहे, उन्होंने धीरे-धीरे उसकी चोंच को दोनों दिशाओं में खींचना शुरू किया और एक ही क्षण में उसकी चोंच को बीच से ऐसे फाड़ दिया जैसे सूखी लकड़ी टूट जाती है, बकासुर जोर से धरती पर गिरा और उसका अंत हो गया, उसी समय आकाश में दुंदुभियाँ बजने लगीं, देवताओं ने पुष्प वर्षा की और कृष्ण की जय-जयकार करने लगे, ग्वालबाल दौड़कर कृष्ण से लिपट गए, कोई उनके चरण पकड़ने लगा तो कोई उन्हें गले लगाने लगा, गायें भी उनके पास आकर प्रेम से उन्हें चाटने लगीं, जब सभी वृंदावन लौटे और माता यशोदा तथा नंद बाबा को यह समाचार मिला तो वे पहले घबरा गए पर कृष्ण को सुरक्षित देखकर उन्हें हृदय से लगा लिया, पूरे वृंदावन में उत्सव सा वातावरण हो गया, इस लीला से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो सच्चे मन से भगवान पर विश्वास करता है उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं और अहंकार तथा अधर्म का अंत निश्चित होता है, बाल रूप में भी कृष्ण ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची शक्ति प्रेम, साहस और धर्म में होती है, ॥ जय श्रीकृष्ण ॥