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Janiye Maha shivratri ki kahani महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन (विवाह), शिव के 'लिंगोद्भव' (अग्नि स्तंभ) के रूप में प्रकट होने या नीलकंठ बनने की कथाओं से जुड़ी है। यह रात शिव के जागृति और ब्रह्मांडीय नृत्य की प्रतीक है, जिसे भक्त रात भर जागरण, पूजा और उपवास के साथ मनाते हैं। महाशिवरात्रि की मुख्य पौराणिक कथाएं: शिव-पार्वती विवाह: मान्यता है कि इसी पावन रात को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। पार्वती ने वर्षों की कठिन तपस्या के बाद शिवजी को पति के रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह दिन उनके दिव्य मिलन का प्रतीक है। शिवलिंग का प्राकट्य: शिव पुराण के अनुसार Dainik Bhaskar, महाशिवरात्रि की रात ही भगवान शिव पहली बार 'लिंग' के रूप में प्रकट हुए थे। जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तब शिवजी ने अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर उन्हें शांत किया था। नीलकंठ कथा (विषपान): समुद्र मंथन के दौरान जब विष (हलाहल) निकला, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे पी लिया। विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। इस रात को उनके द्वारा दुनिया बचाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। शिकारी की कथा (व्रत की महिमा): एक शिकारी अनजाने में शिवरात्रि पर भूखा रहा और बेल के पेड़ के नीचे शिवलिंग पर रात भर बेलपत्र अर्पित करता रहा। अनजाने में की गई इस पूजा से शिवजी प्रसन्न हुए और उसे मोक्ष प्रदान किया, जो सच्चे मन से शिवरात्रि व्रत का महत्व बताती है। महाशिवरात्रि पर भक्त रात भर जागकर शिवजी का ध्यान, रुद्राभिषेक और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हैं। If you like this mahashivratri story like and subscribe my channel