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Written and Composed by Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj Prem Ras Madira-Yugal Madhuri हमारे मन बसे युगल सरकार । गौर बरनि वृषभानुनन्दिनी, नील बरन रिझवार । गरबाँहीं दीने दोउ ठाढ़े, मंजु निकुंज मझार। उत पहिरे नीलाम्बर सोहति, इत पीताम्बर धार । उत सोरह सिंगार सजी इत, नटवर वेष सँवार । उत सिंगार मध्य छबि सोहति, इत छबि मधि सिंगार । बड़भागी ‘कृपालु' जिन छिन छिन, जोरी जुगल निहार ।। भावार्थ- हमारे मनमें श्यामा-श्याम युगल-सरकार बसे हुए हैं । वृषभानुनन्दिनी गोरवर्णकी एवं नन्दकुमार नीलवर्णके हैं। सुन्दर निकुंज के मध्य में दोनों एक-दूसरे के गले में हाथ डाले हुए खड़े हैं। किशोरीजी नीलाम्बर पहने हुए हैं। एवं श्यामसुन्दर पीताम्बर पहने हुए हैं। किशोरीजी ने सोलहों प्रकार का शृंगार किया है एवं श्यामसुन्दर ने नटवर वेष का शृंगार किया है। इधर शृंगाररूपी किशोरीजी के हृदय में छवि-रूप श्रीकृष्णका निवास है। उधर छबि रूप श्रीकृष्ण हृदय में शृंगाररूपी राधा का निवास है । "कृपालु" कहते हैं कि वे लोग परम भाग्यशाली हैं, जो प्रिया-प्रियतमकी युगल जोड़ीको नित्य ही निहारा करते हैं।