У нас вы можете посмотреть бесплатно #इच्छाओं или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
इस प्रेरणादायक प्रवचन में Premanand Ji Maharaj बताते हैं कि इच्छा ही मनुष्य और भगवान के बीच सबसे बड़ी दीवार है। जब तक मन में कोई न कोई चाह, अपेक्षा या लालसा बनी रहती है, तब तक साधक का मन प्रभु में स्थिर नहीं हो पाता। महाराज जी समझाते हैं कि हम सोचते हैं कि इच्छाएँ छोटी हैं, लेकिन वही हमें बार-बार संसार की ओर खींच ले जाती हैं और भगवत प्राप्ति से दूर कर देती हैं। भगवान की ओर बढ़ने का सच्चा मार्ग है — इच्छाओं को सीमित करना, और अंततः उन्हें समाप्त करना। इस संदर्भ में वे महान संत Madhavendra Puri की अत्यंत भावपूर्ण कथा सुनाते हैं। एक बार उनके मन में केवल खीर की इच्छा उठी, लेकिन बाद में उन्होंने स्वयं को बहुत धिक्कारा कि साधक होकर इच्छा कैसे कर ली! उनकी निष्काम भावना से प्रसन्न होकर स्वयं प्रभु ने उन्हें खीर का प्रसाद प्रदान किया। यह कथा हमें सिखाती है कि जब इच्छा समाप्त होती है, तब प्रभु स्वयं साधक की व्यवस्था करते हैं। महाराज जी साधकों को एक सरल अभ्यास बताते हैं — जो साधु, संन्यासी या विरक्त हैं, वे कम से कम 15 दिन या 1 महीने तक “कोई इच्छा नहीं” का संकल्प लें। सामान्य गृहस्थ भी कम से कम 1 दिन या 7 दिन ऐसा संकल्प लेकर देखें। वे कहते हैं, जब मन इच्छाओं से मुक्त होता है, तभी भीतर शांति, संतोष और प्रभु का अनुभव प्रकट होने लगता है। एक छोटा-सा संकल्प जीवन की दिशा बदल सकता है। संदेश: 👉 इच्छा कम होगी तो शांति बढ़ेगी। 👉 अपेक्षा छूटेगी तो भक्ति गहरी होगी। 👉 जब कुछ चाहना बंद होगा, तभी प्रभु मिलेंगे।