У нас вы можете посмотреть бесплатно 1.10. Prithu Avatar aur Gajendra Moksha: 10,000 Kaan aur Ek Pukaar или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
इस विशेष एपिसोड में सुनिए श्री भक्तमाल और भागवत की दो अद्भुत कथाएँ, जो यह सिद्ध करती हैं कि भगवान केवल भक्ति के वश में हैं। 1. अत्याचारी वेन और राजा पृथु का अवतार: कथा का आरंभ राजा वेन के अधर्म से होता है, जिसका अंत ऋषियों की हुंकार से हुआ। ऋषियों द्वारा वेन की भुजाओं के मंथन से भगवान विष्णु के अंशावतार श्री पृथु और लक्ष्मी स्वरूपा अर्चि का प्राकट्य हुआ। राजा पृथु ने पृथ्वी का दोहन कर प्रजा को अन्न-धन से संपन्न किया और इंद्र के अपराध को क्षमा कर राजधर्म का पालन किया। सबसे रोचक प्रसंग यह है कि मोक्ष को ठुकराकर, पृथु जी ने भगवान से 10,000 कान मांगे, ताकि वे निरंतर हरिकथा का रसपान कर सकें। 2. गजेंद्र मोक्ष और शरणागति: दूसरी कथा त्रिकूट पर्वत के उस शक्तिशाली हाथी गजेंद्र की है, जिसे सरोवर में एक ग्राह (मगरमच्छ) ने पकड़ लिया था। जब अपनी शक्ति और परिवार ने साथ छोड़ दिया, तब गजेंद्र ने पूर्व जन्म के संस्कारों से मिले ज्ञान के आधार पर भगवान की 'आर्त पुकार' (स्तुति) की। इस पुकार को सुनकर श्री हरि तत्काल प्रकट हुए और ग्राह का वध कर गजेंद्र की रक्षा की। यह एपिसोड सिखाता है कि चाहे राजा हो या पशु, संकट में पूर्व जन्म की भक्ति और भगवान की शरणागति ही जीव का एकमात्र सहारा है।