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• अकाल मृत्यु से मरने वालो के लिये विशेष पित... आजकल के कई घरों में कुछ ऐसी समस्याएं आती हैं जिन्हें हम नहीं खोज पाते है ये अप्रत्यक्ष समस्याएं हमारे पूर्वजों के कारण भी हो सकती है वैसे हमारे पूर्वज कभी किसी को कष्ट नहीं देते परंतु जब उनकी आने वाली पीढ़ी उनको भूल जाती है तो वह क्रोधित हो जाते हैं और परिवार में कई समस्याएं उत्पन्न करने लगते हैं पितृ दोष से बचने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराना आवश्यक है। आपकी कुंडली में ग्रहों की चाहे जितने भी अच्छी स्थिति हो लेकिन यदि पितृ दोष है तो जीवन में तमाम प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में घर में धन का खर्च बीमारियों में होने लगता है। संतान प्राप्ति में बाधा होती है तथा यदि संतान होती भी है तो प्रगति नहीं कर पाती तथा स्वास्थ्य से कष्ट उठाती है। इससे अचानक दुर्घटना के योग भी बनते हैं। त्रिपिंडी श्राद्ध में ब्रम्हा, विष्णु तथा महेश की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा करके पूजन करने का विधान है। हमें जो आत्मा परेशान करती है उसके लिए अनदिष्ट गोत्र शब्द का प्रयोग किया जाता है क्योंकि वह अज्ञात होती है। प्रेतयोनि प्राप्त उस जीवात्मा को संबोधित करते हुए यह श्राद्ध किया जाता है। इस विधि को श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, फाल्गुन तथा वैशाख में 5, 8,11,13,14 तथा 30 में शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष की तिथियों में भी किया जा सकता है। पितृ पक्ष इस पूजा के लिए सबसे उत्तम समय है।