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Click to Subscribe - shorturl.at/adIJQ Spiritual Bhakti presents Shree Dhana Lakshmi Stotram | श्री धनलक्ष्मी स्तोत्रम् | Shree Dhana Lakshmi Stotram with Lyrics धनदा उवाच:- देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम् । कृपया पार्वती प्राह शङ्करं करुणाकरम् ॥ देव्युवाच:- ब्रहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम् । दरिद्र दलनोपायमञ्जसैव धनप्रदम् ॥ शिव उवाच:- पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः । उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया ॥ स सीतं सानुजं रामं साञ्जनेयं सहानुगम् । प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम् ॥ धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम् । योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम ॥ पठन्तः पाठयन्तोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः । धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता ॥ भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम् । प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम् ॥ धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे । त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम् ॥ धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते । सुधनं र्धामिके देहि यजमानाय सत्वरम् ॥ रम्ये रुद्रप्रिये रूपे रामरूपे रतिप्रिये । शिखीसखमनोमूर्त्ते प्रसीद प्रणते मयि ॥ आरक्त-चरणाम्भोजे सिद्धि-सर्वार्थदायिके । दिव्याम्बरधरे दिव्ये दिव्यमाल्यानुशोभिते ॥ समस्तगुणसम्पन्ने सर्वलक्षणलक्षिते । शरच्चन्द्रमुखे नीले नील नीरज लोचने ॥ चञ्चरीक चमू चारु श्रीहार कुटिलालके । मत्ते भगवती मातः कलकण्ठरवामृते ॥ हासाऽवलोकनैर्दिव्यैर्भक्तचिन्तापहारिके । रूप लावण्य तारूण्य कारूण्य गुणभाजने ॥ क्वणत्कङ्कणमञ्जीरे लसल्लीलाकराम्बुजे । रुद्रप्रकाशिते तत्त्वे धर्माधरे धरालये ॥ प्रयच्छ यजमानाय धनं धर्मेकसाधनम् । मातस्त्वं मेऽविलम्बेन दिशस्व जगदम्बिके ॥ कृपया करुरागारे प्रार्थितं कुरु मे शुभे । वसुधे वसुधारूपे वसु वासव वन्दिते ॥ धनदे यजमानाय वरदे वरदा भव । ब्रह्मण्यैर्ब्राह्मणैः पूज्ये पार्वतीशिवशङ्करे ॥ स्तोत्रं दरिद्रताव्याधिशमनं सुधनप्रदम् । श्रीकरे शङ्करे श्रीदे प्रसीद मयिकिङ्करे ॥ पार्वतीशप्रसादेन सुरेश किङ्करेरितम् । श्रद्धया ये पठिष्यन्ति पाठयिष्यन्ति भक्तितः ॥ सहस्रमयुतं लक्षं धनलाभो भवेद् ध्रुवम् । धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च । भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन-धान्यादिसम्पदः ॥ ।। इति श्री धनलक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।। इस मंत्र के जाप से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आर्थिक परेशानियों का अंत हो जाता है। दुखों का नाश होता है। इस मंत्र से माता लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। इस बीज मंत्र का अर्थ होता है कि हे परमपिता परमात्मा, हे महामाया, हे माता लक्ष्मी मेरे दुखों को हरकर मेरे जीवन को समृद्धि दें। जो व्यक्ति इस मंत्र का सच्चे मन से जाप करता है उसके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस मंत्र का निरंतर जाप आपके जीवन में सकारात्मकता लाने का काम करता है। मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है। खासतौर से इस मंत्र के जाप से कर्ज से मुक्ति मिलने की मान्यता है। कहते हैं अगर कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का हर दिन जाप किया जाए तो किसी भी तरह के कर्ज से छुटकारा मिल जाता है। मंत्र जाप करने से पहले घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जला लें। माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप स्फटिक या कमलगट्टे की माला से करना चाहिए। मंत्र उच्चारण करते समय कम से कम 3 माला जाप अवश्य करें। मंत्र का जाप किसी आसन पर बैठकर करें। जाप पूरा करने के बाद माला अपने स्थान पर वापस रख दें। ************************ Song – Shree Dhana Lakshmi Stotram Album – Shree Dhana Lakshmi Stotram Label - Spiritual Bhakti Click to Subscribe - shorturl.at/adIJQ