У нас вы можете посмотреть бесплатно "ईश्वरी वरदानों से, आशीर्वादों से संगमयुग पर खुद को भरपुर, मालामाल करो"। (18/02/2026) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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ओम् शांति। "सतबाप-सतटीचर-सतगुरु के वरदानों से, आशीर्वादों से संगमयुग पर खुद को भरपुर, मालामाल करो"। "बाप कहते हैं- तुम बच्चे सौभाग्यशाली, हजार भाग्यशाली, करोड़ भाग्यशाली, पदम, अरब, खरब भाग्यशाली हो"। "जो बच्चे अपने को सौभाग्यशाली समझते हैं, वह जरूर अच्छी तरह से बाप को याद करते रहेंगे"। "वही रूहानी गुलाब के फूल बनेंगे"। यह तो "नटशेल" में समझाना होता है। "बनना तो रूहानी खुशबूदार फूल है"। "मुख्य है याद की बात"। संन्यासियों ने "योग" अक्षर कह दिया है। "लौकिक" बाप ऐसे नहीं कहेंगे कि मुझे याद करो या पूछे कि मुझे याद करते हो? "बाप बच्चे को, बच्चा बाप को याद है ही"। यह तो "लॉ" है। यहां पूछना पड़ता है क्योंकि माया भुला देती है। यहां आते हैं, समझते हैं- हम, बाप के पास जाते हैं तो बाप की याद रहनी चाहिए इसलिए बाबा चित्र भी बनाते हैं तो वह भी साथ में हो। "पहले-पहले हमेशा बाप की महिमा शुरू करो"। "यह हमारा बाबा है, यूँ तो सबका बाप है"। "सर्व का सद्गति दाता, ज्ञान का सागर नॉलेजफुल है"। "बाबा हमको सृष्टि चक्र के आदि-मध्य-अंत का ज्ञान देते हैं, जिससे हम त्रिकालदर्शी बन जाते हैं"। "त्रिकालदर्शी इस सृष्टि पर कोई मनुष्य हो नहीं सकता"। "बाप कहते हैं- यह लक्ष्मी-नारायण भी त्रिकालदर्शी नहीं हैं"। यह "त्रिकालदर्शी" बन क्या करेंगे? "तुम बनते हो और बनाते हो"। "इन लक्ष्मी-नारायण में ज्ञान होता, तो परंपरा चलता"। "बीच में तो विनाश हो जाता है इसलिए परंपरा तो चल न सके"। "तो बच्चों को इस पढ़ाई का अच्छी रीति सिमरन करना है"। "तुम्हारी भी ऊंच ते ऊंच पढ़ाई संगम पर ही होती है"। "तुम याद नहीं करते हो, देह-अभिमान में आ जाते हो तो माया थप्पड़ मार देती है"। "जब 16 कला संपूर्ण बनेंगे, तब विनाश की भी तैयारी होगी"। "वह विनाश के लिए और तुम अविनाशी पद के लिए तैयारी कर रहे हो"। "कौरव और पांडवों की लड़ाई हुई नहीं, कौरवों और यादवों की लगती है"। "ड्रामा अनुसार पाकिस्तान भी हो गया"। "वह भी शुरू तब हुआ जब तुम्हारा जन्म हुआ"। "अब बाप आए हैं तो सब प्रैक्टिकल होना चाहिए"। "यहां के लिए ही कहते हैं- रक्त की नदियां बहती हैं, तब फिर घी की नदी बहेगी"। अब भी देखो लड़ते रहते हैं। फलाना शहर दो नहीं तो लड़ाई करेंगे। यहां से पास न करो, यह हमारा रास्ता है। अब वह क्या करें? स्टीमर कैसे जाएंगे? फिर राय करते हैं। जरूर राय पूछते होंगे। मदद की उम्मीद मिली होगी, वह आपस में ही खत्म कर देंगे। "यहां फिर सिविल वॉर की ड्रामा में नूंध है"। "अभी बाप कहते हैं- मीठे बच्चे, बहुत-बहुत समझदार बनो"। "यहां से बाहर घर में जाने से फिर भूल नहीं जाओ"। "यहां तुम आते हो कमाई जमा करने"। "छोटे-छोटे बच्चों को ले आते हो, तो उनके बंधन में रहना पड़ता है"। "यहां मधुबन में तो ज्ञान सागर के कंठे पर आते हो, जितनी कमाई करेंगे उतना अच्छा है"। इसमें लग जाना चाहिए। "तुम आते ही हो अविनाशी ज्ञान रत्नों की झोली भरने"। "गाते भी हैं ना? भोलानाथ भर दे झोली"। "भक्त तो शंकर के आगे जाकर कहते हैं- झोली भर दो"। "वह फिर शिव-शंकर को एक समझ लेते हैं"। "शिव-शंकर महादेव कह देते हैं"। "तो महादेव बड़ा हो जाता"। ऐसी छोटी-छोटी बातें बहुत समझने की हैं। "तुम बच्चों को समझाया जाता है- अभी तुम ब्राह्मण हो, नॉलेज मिल रही है"। "पढ़ाई से मनुष्य सुधरते हैं"। "चाल-चलन भी अच्छी होती है"। "अभी तुम पढ़ते हो"। "जो सबसे जास्ती पढ़ते और पढ़ाते हैं, उनके मैनर्स भी अच्छे होते हैं"। "तुम कहेंगे सबसे अच्छे मम्मा-बाबा (ब्रह्मा-सरस्वती) के मैनर्स हैं"। "यह ब्रह्मा फिर हो गई बड़ी मम्मा, जिसमें शिवबाबा प्रवेश कर बच्चों को रचते हैं"। "मात-पिता कंबाइंड हैं"। कितनी गुप्त बातें हैं? "जैसे तुम पढ़ते हो, वैसे मम्मा भी पढ़ती थी"। "उनको एडॉप्ट किया, सयानी थी तो ड्रामा अनुसार सरस्वती नाम पड़ा"। "ब्रह्मपुत्रा बड़ी नदी है"। "मेला भी लगता है सागर और ब्रह्मपुत्रा का"। "यह ब्रह्मा बड़ी ज्ञान नदी ठहरी तो माँ भी ठहरी ना"? "तुम मीठे-मीठे बच्चों को कितना ऊंचा ले जाते हैं"? "बाप तुम बच्चों को ही देखते हैं"। "उनको तो किसी को याद करना नहीं है"। "इनकी (ब्रह्मा) आत्मा को तो बाप को याद करना है"। "बाप कहते हैं- हम बापदादा दोनों, बच्चों को देखते हैं"। "मुझ (ब्रह्मा) आत्मा को तो साक्षी हो नहीं देखना है", परंतु "बाप के संग में हम भी ऐसे देखता हूं"। "बाप के साथ रहता तो हूं ना"? "उनका बच्चा हूँ, तो साथ में देखता हूँ"। "मैं विश्व का मालिक बन घूमता हूं, जैसे कि मैं ही यह करता हूं"। "मैं दृष्टि देता हूं"। "यहां देह सहित सब कुछ भूलना होता है"। बाकी "बच्चा, ब्रह्मा और बाप, शिवबाबा" जैसे एक हो जाते हैं। "तो बाप समझाते हैं- खूब पुरुषार्थ करो"। बरोबर, मम्मा-बाबा सबसे जास्ती सर्विस करते हैं। घर में भी माँ-बाप बहुत सर्विस करते हैं ना? सर्विस करने वाले जरूर पद भी ऊंच पाएंगे तो फिर फॉलो करना चाहिए ना? "जैसे बाप अपकारियों पर भी उपकार करते हैं, ऐसे तुम भी फॉलो फादर करो"। इसका भी अर्थ समझना है। "बाप कहते हैं- मुझे याद करो और किसका भी नहीं सुनो"। "कोई कुछ बोले, सुना-अनसुना कर दो"। "तुम मुस्कराते रहो, तो वह आपेही ठंडा हो जाएगा"। "बाबा ने कहा था कोई क्रोध करे तो तुम उन पर फूल चढ़ाओ, बोलो तुम अपकार करते हो, हम उपकार करते हैं"। "बाप खुद कहते हैं- सारी दुनिया के मनुष्य मेरे अपकारी हैं, मुझे सर्वव्यापी कहकर कितनी गाली देते हैं"? "मैं तो सबका उपकारी हूँ"। तुम बच्चे भी सबका उपकार करने वाले हो। तुम ख्याल करो- हम क्या थे? अभी क्या बनते हैं? "विश्व के मालिक बनते हैं"। "ख्याल-ख्वाब में भी नहीं था"। बहुतों को घर बैठे साक्षात्कार हुआ है। परंतु साक्षात्कार से कुछ होता थोड़ेही है? आहिस्ते-आहिस्ते झाड़ वृद्धि को पाता रहेगा। "यह नया दैवी झाड़ स्थापन हो रहा है ना"? "बच्चे जानते हैं- हमारा दैवी फूलों का बगीचा बन रहा है"। अच्छा। (12.07.2025)