У нас вы можете посмотреть бесплатно #रीतिकाल или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी गद्य विधा, हिंदी व्याकरण, काव्य शास्त्र NET- jrf, BPSC TRE, STET, BET,RPSC, DSSSB, CTET, TGT-PGT(All State), KVS, NVS,and other Hindi exam.#रीतिकाल#उत्तरमध्य काल#हिंदी साहित्य का इतिहास #BPSC TRE 4.0, #UGC NET#STET#TGT #PGT #रीतिकाल हिंदी साहित्य का वह #उत्तर मध्यकाल है, जिसकी समय सीमा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार संवत् 1700 से संवत् 1900 तक मानी जाती है। इस काल में #अलंकरण, #रस, नायक-नायिका भेद और ध्वनि आदि के आधार पर लक्षण ग्रंथों की रचना हुई, जिसमें कला पक्ष और सौंदर्य पर अत्यधिक ध्यान दिया गया। इस काल के साहित्य में #श्रृंगार रस की प्रधानता रही, लेकिन भक्ति, वीरता और नीतिपरक रचनाएँ भी मिलती हैं, और इसका अधिकांश साहित्य दरबारी संस्कृति से प्रभावित था। प्रमुख विशेषताएँ: काव्य का कलात्मक पक्ष: इस काल में कलात्मकता और काव्य के सौंदर्य पर विशेष ध्यान दिया गया। श्रृंगार रस की प्रधानता: श्रृंगार रस, विशेषकर संयोग और वियोग श्रृंगार का चित्रण बहुत मिलता है। लक्षण ग्रंथ: कविताओं में रस, अलंकार, ध्वनि, नायक-नायिका-भेद आदि का विवेचन करने वाले लक्षण ग्रंथ लिखे गए। दरबारी साहित्य: अधिकांश कवि राजाओं के दरबारों में रहकर रचनाएँ करते थे, जिससे दरबारों का प्रभाव साहित्य पर भी दिखता था। विविध विषय: श्रृंगार के अलावा भक्ति, वीरता और नीति पर आधारित कविताएँ भी इस युग में लिखी गईं। प्रमुख कवि एवं रचनाएँ: #केशवदास: रीति काव्य की परंपरा का आरंभ किया। इनकी रचनाओं में 'कविप्रिया' और 'रसिकप्रिया' प्रमुख हैं। #चिंतामणि: रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। #बिहारीलाल: 'बिहारी-सतसई' के रचयिता, जो श्रृंगार, भक्ति और नीतिपरक दोहों के लिए प्रसिद्ध हैं। #देव, #भूषण, #मतिराम: ये भी इस युग के अन्य महत्वपूर्ण कवि थे। सांस्कृतिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि: इस काल में मुग़ल साम्राज्य का विघटन हो रहा था और सामंती व्यवस्था का प्रभाव था, जिसके कारण राज दरबारों में विलास का बोलबाला था। साहित्य पर दरबारों का प्रभाव स्पष्ट था, और कवियों ने आश्रयदाताओं की प्रसन्नता के अनुसार ही रचनाएँ कीं। हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी गद्य विधा, हिंदी व्याकरण, काव्य शास्त्र NET- jrf, BPSC TRE, STET, BET,RPSC, DSSSB, CTET, TGT-PGT(All State), KVS, NVS,and other Hindi exam.9570408013हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी गद्य विधा, हिंदी व्याकरण, काव्य शास्त्र NET- jrf, BPSC TRE, STET, BET,RPSC, DSSSB, CTET, TGT-PGT(All State), KVS, NVS,and other Hindi exam.