У нас вы можете посмотреть бесплатно सतगुरु ने ब्याह कराया हे || 𝗦𝗮𝘁𝗴𝘂𝗿𝘂 𝗡𝗲 𝗕𝘆𝗮𝗮𝗵 𝗞𝗮𝗿𝗮𝘆𝗮 𝗛𝗲 || 𝗔𝗿𝘂𝗻 𝗚𝗼𝘆𝗮𝗹 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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नमस्कार दोस्तों कबीर साहेब के शिष्य धनी धर्म दास जी के नाम के नाम से प्रसिद्ध उनकी छाप वाला यह भजन प्रस्तुत है जिसमे वो कहते है की जैसे लड़के लड़की के विवाह को पक्का करवाने मे एक मिडिएटर की जरुरत होती है वैसे ही हमें अगर परमात्मा या स्वयं से मिलना हो तो सद्गुरु जैसा माध्यम होना बेहद जरुरी है तभी सुरति से शब्द के मिलने की कला समझ मे आएगी। यहाँ गुरु को पंडित/पुरोहित माना गया है। “लगन गलाया” का अर्थ है संसार की झूठी लगन, मोह-माया की पकड़ को ढीला करना और स्वयं की चेतना की पकड़ को मजबूत करना। और “अच्छा-अच्छा लगन लिखाया” यानी गुरु ने ईश्वर से जुड़ने का शुभ मुहूर्त बता दिया गुप्त भेद बता दिया, जीवन जीने की कला बता दी। गुरु ने जीवन की दिशा बदल “जन्म-जन्म की कुआरी म्हारी सुरति…” सुरति, चेतना, आत्मा, ध्यान कहते हैं मेरी आत्मा तो जन्मों-जन्मों से कुंवारी थी। क्यों? क्योंकि शरीर बदले रिश्ते बदले धर्म बदले पर परमात्मा से सच्चा मिलन कभी नहीं हुआ। इसलिए आत्मा “कुंवारी” ही रही अबकी बार गुरु की कृपा से नाम, ज्ञान, विवेक के सहारे आत्मा का विवाह परमात्मा से हो गया। यह विवाह शरीर का नहीं रस्मों का नहीं यह है अहंकार का टूटना मैं का मिटना और परम में लीन हो जाना गुरु ने मेरी चेतना को संसार की पकड़ से छुड़ाकर ईश्वर से जोड़ दिया। जो आत्मा जन्मों से भटकी हुई थी, आज उसे उसका सच्चा स्वामी मिल गया। अब अलगाव नहीं, अब मिलन है “यह भजन देह के ब्याह का नहीं है, यह आत्मा के परमात्मा से मिलन का उत्सव है।” अगर भजन पसंद आ जाये तो लाइक शेयर और कमेंट जरूर करें 🙏 मंजिरे - रमाकांत गोयल ढोलक-अंकित मालवीय हारमोनियम-बालकृष्ण मालवी नगारी- मनोज घुडावत विडिओ एडिटिंग - भावित स्टूडियो मूसाखेड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग - तम्बूरा स्टूडियो, रतलाम