У нас вы можете посмотреть бесплатно ॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ -- JAI SHREE RAM или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ 1 ॥ रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ 2 ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ 3 ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥ 4 ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ 5 ॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ 6 ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ 7 ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ 8 ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा॥ 9 ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥ 10 ॥ लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ 11 ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ 12 ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ 13 ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ 14 ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ 15 ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ 16 ॥ तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ 17 ॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ 18 ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ 19 ॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ 20 ॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ 21 ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ 22 ॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक ते काँपै॥ 23 ॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥ 24 ॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ 25 ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥ 26 ॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ 27 ॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ 28 ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ 29 ॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ 30 ॥ अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥ 31 ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ 32 ॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ 33 ॥ अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ 34 ॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ 35 ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ 36 ॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ 37 ॥ जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ 38 ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 39 ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ 40 ॥ दोहा पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥