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क्या कोई राजा अपनी भूख और प्यास से बड़ा दूसरों का दुख समझ सकता है? 👑💔 आज BM HistoryLab में हम आपके लिए लेकर आए हैं चंद्रवंश के उस महान शासक की कहानी, जिसकी करुणा ने स्वयं ईश्वर को भी धरती पर आने के लिए विवश कर दिया। यह गाथा है महाराज रन्तिदेव की, जिन्होंने अकाल के समय अपना सब कुछ त्याग दिया और 48 दिनों के भीषण उपवास के बाद भी अपनी अंतिम रोटी और पानी की बूंद दूसरों को दे दी। इस हृदयस्पर्शी वीडियो में आप देखेंगे: रन्तिदेव के राज्य में पड़े उस भयानक अकाल का दृश्य। कैसे अड़तालीस दिनों के उपवास के बाद नियति ने उनकी परीक्षा ली। ब्राह्मण, शूद्र और यहाँ तक कि कुत्तों के रूप में आए अतिथियों का सत्कार। वह प्रसिद्ध श्लोक जिसमें रन्तिदेव ने 'मोक्ष' के स्थान पर 'दूसरों के दुख' को माँगा। देवताओं का प्रकटीकरण और मानवता की जीत। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति मंदिरों के पत्थरों में नहीं, बल्कि भूखे को भोजन और प्यासे को पानी देने में है। Topics covered in this video: The story of King Rantidev and his immense sacrifice. The philosophy of 'Seva' in Sanatan Dharma. Why did Rantidev reject Moksha (Salvation)? The divine test by the Holy Trinity (Trimurti). Hashtags: #MaharajaRantidev #Compassion #AncientIndianHistory #HinduMythology #SanatanDharma #StoryOfSacrifice #KingRantidev #PuranicStories #Motivation #BMHistoryLab Keywords (कीवर्ड्स): महाराज रन्तिदेव की कहानी, रन्तिदेव का महादान, 48 दिनों का उपवास, भागवत पुराण की कथा, प्राचीन भारत के महान दानी, रन्तिदेव का श्लोक, परोपकार और धर्म, हिंदू पौराणिक कथाएं, Story of King Rantidev in Hindi, Significance of Charity in Hinduism.