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सीरी फ़ोर्ट इलाक़ा, मंगोलों के दबे इतिहास पर बसाई हुई बस्ती है, जो आज की दिल्ली का एक ख़ास हिस्सा है| भले ही सीरी फ़ोर्ट आज अपने ऑडिटोरियम और स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्स के लिए मशहूर क्यों ना हो, लेकिन क्या आप जानते हैं, कि इसका नाम, दिल्ली के इतिहास में बसी उस नगरी पर आधारित है, जिसे एक दंतकथा के अनुसार, दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन ख़िलजी ने मंगोलों के कलम हुए सिरों पर बसाया था? तेरहवीं शताब्दी के अंत में अपने ससुर और पहले ख़िलजी सुलतान जलालउद्दीन के क़त्ल के बाद, अल्लाउदीन दिल्ली के तख़्त पर बैठा था| बाद में, अल्लाउदीन की फ़ौज ने रणथम्बोर, गुजरात, मालवा जैसे राज्यों पर कब्ज़ा करते-करते अफ़ग़ानिस्तान के मंगोल इलाकों से लेकर दक्षिण में मदुरै तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया| इन सबके बीच, सन 1303 में चित्तोड़ पर हुए हमले का ज़िक्र मलिक मुहम्मद जायसी की रचित “पद्मावत” में भी है, जिसको हमने हाल में आई हिंदी फिल्म के रूप में भी देखा| इस दौरान मंगोल जब अपने साम्राज्य का विस्तार मध्य एशिया से आगे कर रहे थे, तब उन्होंने भारत का भी रुख़ किया| मगर ये मुहिम अलाउद्दीन के सामने नाकाम रही। अलाउद्दान उन्हें बार-बार शिकस्त देता रहा | जैसा कि सब जानते हैं कि दिल्ली शहर को राजपूतों के क़िले राय पिथोरा से लेकर अंग्रेज़ों की नयी दिल्ली तक आठ दफ़ा बसाया गया था| ठीक वैसे ही अलाउद्दीन ने इसके दूसरे नगर सीरी को सन 1297 सेसन 1307 के बीचबसाया था| अलाउद्दीन ने सेल्जुक तुर्कों के साथ मिलकर सीरी शहर का निर्माण किया था, जिनकी सल्तनत मंगोलों ने हड़प ली थी और फिर अलाउद्दीन के दरबार में शरण ली थी| सिरी को बनाने में 70 हज़ार मज़दूर और कारीगर लगे थे! सन 1299 में, गुजरात के हमले के दौरान, अलाउद्दीन की फ़ौज में मौजूद मंगोलों ने तीन बार बग़ावत की, मगर नाकाम रहे| उसके बाद, अल्लाउदीन ने कई सख्त क़दम उठाए, जैसे उनकी तनख़्वाह आधी कर दी गई या फिर कईयों को बर्खास्त कर दिया गया| इसकी वजह से दिल्ली में बसे मंगोलों में असंतोष फ़ैल गया और सन1311 में, अलाउद्दीन और मालिक काफ़ूर दोनों की हत्या की योजना बनाई गयी| लेकिन अलाउद्दीन के वफ़ादारों को इस बात की भनक लग गई और मंगोलों की इस मुहिम से पहले ही, अलाउद्दीन की फ़ौज ने मंगोलों पर हमला कर दिया जिसमें, क़रीब आठ हज़ार मंगोलों के सिर क़लम किए गए| माना जाता है, कि उन्हीं मंगोलों के अवशेषों पर बसाई गई बस्ती का नाम “सीरी” रखा गया था| सन 1316 में अलाउद्दीन की मौत के बाद, खिलजी सल्तनत ज़्यादा वक़्त ना टिक पाई और सन 1320 में खिलजी सल्तनत का अंत हुआ| चौदहवीं शताब्दी के मध्य में, दुसरे तुग़लक सुलतान मुहम्मद बिन तुग़लक के काल में , सीरी को दिल्ली के तीसरे शहर जहांपनाह का हिस्सा बनाया गया, जिसमें क़िला राय पिथोरा और तुग़लक़ाबाद भी शामिल थे| सन 1398 में दिल्ली पर आक्रमण के दौरान मंगोल हमलावर तैमूर ने अपनी निजी डायरी में सीरी का ज़िक्र एक गोलाकार क़िले के रूप में किया था। जहां पर उसने नरसंहार का आदेश दिया था| सीरी के ईंट,पत्थर और अन्य सामान को,सन 1351 में सुलतान, फ़िरोज़ शाह तुग़लक ने अपनी राजधानी फ़िरोज़ाबाद और सन 1545 में शेर शाह सूरी ने अपनी राजधानी शेरगढ़ के निर्माण में इस्तेमाल किया| उसके बाद इसके खंडहर को छः शताब्दियों बाद दोबारा तवज्जोह तब मिली, जब सन 1982 में एशियाड खेलों के दौरान, इसी के नाम पर एक नए क्रीडा-स्थल सीरी फोर्ट स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण हुआ| उसी दौरान, यहाँ सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम भी बनावाया गया, जहां आज कई महत्वपूर्ण समाराहों का आयोजन होता रहता है| Please subscribe to the channel and leave a comment below! =============== Join us at https://www.livehistoryindia.com to rediscover stories that are deeply rooted in our history and culture. Also, follow us on - Twitter: / livehindia Facebook: / livehistoryindia Instagram: / livehistoryindia ===============