У нас вы можете посмотреть бесплатно सच्चा आदमी हारता क्यों है, बेईमान सब जीतते क्यों हैं? || आचार्य प्रशांत (2024) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/de... iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya... 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articl... ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #Striyon Ki Sthiti #Dharm Aur Yudh #Dharmikta Ka Ahankar #Andhvishwas #Bharat Ki Durdaasha #Dharm Ka Swang #Akrantaon Ka Prabhav वीडियो जानकारी: 31.01.24, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा सच्चा आदमी हारता क्यों है, बेईमान सब जीतते क्यों हैं? || आचार्य प्रशांत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 1:54 - धर्म और युद्ध में हार 9:12 - भारत के दर्शन और सत्ता का पतन 17:16 - भेद-भाव और शोषण 25:29 - डर और आक्रामकता 27:54 - कॉलेज में अनुभव(Psychology का विवरण) 30:30 - कबीर दोहे और भजन 31:13 - समापन विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने भारतीय समाज में धर्म और धार्मिकता के वास्तविक अर्थ पर गहन चर्चा की है। उन्होंने बताया कि भारतीय समाज में धर्म का वास्तविक स्वरूप खो गया है और लोग केवल बाहरी रीति-रिवाजों और परंपराओं को धर्म मानते हैं। आचार्य जी ने यह भी कहा कि भारतीय समाज ने अपने ही लोगों का शोषण किया है, विशेषकर महिलाओं का, और यह स्थिति आक्रांताओं के आने से पहले भी थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि धर्म का असली अर्थ स्वतंत्रता और समानता है, और जब तक हम अपने भीतर की धार्मिकता को नहीं पहचानेंगे, तब तक हम सच्चे धार्मिक नहीं बन सकते। आचार्य जी ने यह भी बताया कि महान क्रांतिकारी जैसे सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह ने अपने जीवन में गीता और वेदांत के सिद्धांतों को अपनाया था, जिससे उन्हें साहस और प्रेरणा मिली। आचार्य जी ने यह भी कहा कि हमें अपने अतीत की गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और सच्चे अर्थ में धार्मिक बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान और शिक्षा को बढ़ावा देना है, न कि अंधविश्वास और रूढ़ियों में बंधना। प्रसंग: ~ मन को शांति चाहिए, दिक्कत ये होती है कि अहम अपनी चाह को ही अपनी पात्रता बना लेता है। ~ अहम ने अपने इर्द गिर्द संसार क्यों तैयार करा है? ~ अहम सच के संपर्क में आकर क्यों टूटता है? ~ मैं कहने का अर्थ होता है, अपने मुक्त स्वतंत्र अस्तित्व की घोषणा करना। ~ परतंत्रता का एक लक्षण होता है स्वतंत्रता की प्यास। जो परतंत्र होगा उसके मन में कहीं न कहीं आजादी का भाव उठेगा। ~ जहाँ जो है नहीं हम उसकी आस बांध लेते हैं, शास्त्र में अविद्या की यही परिभाषा है। संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~