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भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013** भारत में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनों का एक ऐतिहासिक और जनोन्मुखी सुधार है। इस अधिनियम ने औपनिवेशिक काल के *भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894* को समाप्त कर एक अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और मानव-केंद्रित व्यवस्था स्थापित की। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक प्रयोजन, औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन के साथ-साथ प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों को *उचित मुआवज़ा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन* सुनिश्चित करना है। इस अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता *Social Impact Assessment (SIA)* है, जिसके माध्यम से यह आकलन किया जाता है कि भूमि अर्जन का सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव क्या होगा। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए 70% और PPP परियोजनाओं में 80% प्रभावित भूमि स्वामियों की सहमति को अनिवार्य बनाया गया है। आदिवासी एवं अनुसूचित क्षेत्रों में यह अधिनियम विशेष सुरक्षा प्रावधान प्रदान करता है, जिससे उनकी भूमि, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके। UPSC, JPSC, BPSC तथा अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में यह अधिनियम अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह *भूमि अधिग्रहण, विकास बनाम अधिकार, आदिवासी हित, पुनर्वास नीति और सामाजिक न्याय* जैसे विषयों से सीधे जुड़ा हुआ है। यह अधिनियम आधुनिक भारत में विकास और मानवाधिकारों के बीच संतुलन का एक प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत करता है। --- #भूमि_अर्जन_अधिनियम_2013 #LandAcquisitionAct2013 #पुनर्वास_एवं_पुनर्स्थापन #IndianPolity #भारतीय_अर्थव्यवस्था #UPSC #JPSC #BPSC #StatePCS #LandReforms #SocialImpactAssessment #TribalRights #GS_Paper_2