У нас вы можете посмотреть бесплатно ललिता साधना | शक्ति और सिद्धि का मार्ग | Lalita Jayanti Special Sadhna или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
राजराजेश्वरी विद्या, 65वें तंत्र और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर शास्त्रीय दृष्टिकोण से चर्चा। सिद्धि, तंत्र बाधा, धन-संबंध समस्याएँ और मासिक धर्म में साधना जैसे विषयों की स्पष्ट जानकारी। A discussion on Rajrajeshwari Vidya, the 65th Tantra, and key aspects of spiritual practice from a scriptural perspective. This video addresses siddhi, tantra obstacles, negative energies, wealth and relationship issues, and the question of sadhana during the menstrual cycle. • ललिता त्रिपुरसुंदरी | सौंदर्य और धन की सर्... 🌸 संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step) 🌸 1. आसन एवं शुद्धि • आसन पर बैठें • दाएँ हाथ में जल लेकर “विष्णु-विष्णु” कहते हुए पूरे शरीर पर छिड़कें • भूमि माता को स्पर्श कर प्रणाम करें • हाथ में जल लेकर आसन पर छिड़कें और भाव करें कि आसन पवित्र हो रहा है 2. गुरु स्मरण अपने गुरु को स्मरण करें। यदि गुरु न हों तो भगवान शिव को गुरु स्वरूप मानें और मंत्र बोलें— • निखिलेश्वरानंदाय नमः • त्रिजटाय नमः • भूतनाथाय नमः • दिव्याचेतनानंदाय नमः • ललिता शरण समितमुखी अम्बाय नमः 3. गुरु श्लोक गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ 4. गणेश एवं भैरव स्मरण भगवान गणेश और भैरव जी को स्मरण करें या मंत्र बोलें— • श्री गणेशाय नमः • श्री भैरवाय नमः 5. दिक्पाल एवं द्वारपाल पूजन दोनों हाथ सिर के ऊपर जोड़ें और मंत्र बोलें— ॐ इन्द्रादि दश दिक्पालेभ्यो नमः। ॐ गणेशादि द्वारपालेभ्यो नमः। 6. नवग्रह स्मरण नवग्रहों का स्मरण करें या निम्न मंत्र पढ़ें— ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी भानुः शशिः भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिः राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥ 7. प्रारंभिक जप (1-1 माला) • किसी भी गुरु का मंत्र या •नमः शिवाय •ॐ गं गणपतये नमः • बं भैरवाय नमः / श्री भैरवाय नमः 8. श्री यंत्र स्थापना • श्री यंत्र 2D या 3D लें • यदि संभव न हो तो काग़ज़ पर बनाएं या प्रिंट निकालकर लैमिनेट करवा लें श्री यंत्र को थाली में रखें और भाव करें— “श्री यंत्र की समस्त देवियाँ इसमें आकर विराजमान हों।” 9. पंचोपचार पूजन (जो उपलब्ध हो वही अर्पित करें) • पूज्यामी / तर्पयामि – पुष्प व जल • गन्ध – चंदन या इत्र • पुष्प – फूल • धूप – अगरबत्ती • दीप – दीपक • नैवेद्य – सूखे मेवे / फल / गुड़ / रोटी पर चीनी • ताम्बूल – पान मंत्र (हर क्रिया के साथ): कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: श्री पादुकाम् पूज्यामि तर्पयामि नमः कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: गन्धं परिकल्पयामि कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: पुष्पं समर्पयामि कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: धूपं परिकल्पयामि कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: दीपं दर्शयामि कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: अमृतनैवेद्यं निवेदयामि कामेश्वर कामेश्वरी श्री चक्रस्य समस्त भैरव भैरवी नित्यकला देवी मानवोग दिव्योग सिद्धौग गुरुमण्डल सहित: ताम्बूलादि सर्वोपचारान् परिकल्पयामि | 10. देवी खड्गमाला पाठ इसके बाद देवी खड्गमाला स्तोत्र का पाठ करें। 11. न्यास करन्यास: ऐं अंगुष्ठाभ्यां नमः क्लीं तर्जनीभ्यां नमः सौः मध्यमाभ्यां नमः ऐं अनामिकाभ्यां नमः क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः सौः करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः अंगन्यास: ऐं हृदयाय नमः क्लीं शिरसे स्वाहा सौः शिखायै वषट् ऐं कवचाय हुम् क्लीं नेत्रत्रयाय वौषट् सौः अस्त्राय फट् भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः 12. विनियोग विनियोग के समय हाथ में थोड़ा जल / पुष्प / अक्षत लें और अंत में श्री यंत्र पर अर्पित करें। 13. पाठ संख्या • भैरव एवं भैरवी – दोनों के लिए • संख्या: 5 जोड़े / 9 / 11 (जो संभव हो) 14. मुद्रा यदि संभव हो तो अंत में 10 मुद्राएँ दिखाएँ। 15. अंतिम जप (1-1 माला) • बं भैरवाय नमः / श्री भैरवाय नमः • ॐ गं गणपतये नमः • किसी भी गुरु का मंत्र या नमः शिवाय 16.क्षमा प्रार्थना करें — आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। यत् पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥ चक्रों के नाम :- •त्रैलोक्य मोहन •सर्वाशा परिपूरक •सर्वसंक्षोभण •सर्वसौभाग्यदायक •सर्वार्थसाधक •सर्वरक्षाकर •सर्वरोगहर •सर्वसिद्धिप्रद •सर्वानंदमय WhatsApp Channel:- https://whatsapp.com/channel/0029Vb7q... For Subscribe Our channel: / @shakt.mahima.108