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क्या आपका मन बार-बार भटक जाता है? क्या ध्यान लगाने की कोशिश करते हुए भी मन स्थिर नहीं रहता? भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 26 (ध्यानयोग) में भगवान श्रीकृष्ण मन को रोकने का नहीं — बल्कि उसे लौटाने का मार्ग बताते हैं। श्लोक: यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्॥ अर्थ: यह चंचल और अस्थिर मन जहाँ-जहाँ भटकता है, वहाँ-वहाँ से उसे नियंत्रित करके पुनः आत्मा में स्थापित करना चाहिए। इस Episode 9 में हम समझेंगे: • मन क्यों भटकता है? • क्या भटकना गलती है? • ध्यान का वास्तविक अर्थ क्या है? • कृष्ण का व्यावहारिक समाधान क्या है? • जीवन में “वापस लौटने” की साधना कैसे करें? यह केवल ध्यान की बात नहीं — यह जीवन की दिशा की बात है। अगर आप मन की अस्थिरता, चिंता, तुलना, परिणाम-भय या मानसिक विचलन से जूझ रहे हैं — तो यह श्लोक आपके लिए है। Krishna Jeevan Sutra का यह episode आपको सिखाएगा: मन को रोकना नहीं — मन को दिशा देना। #BhagavadGita #ध्यानयोग #KrishnaJeevanSutra #SpiritualWisdom #ManKaBhattakna #IndianPhilosophy #SelfControl #InnerPeace #MeditationWisdom — This video has taken the help of various AI tools for script structuring, visual planning, and production assistance while preserving the authenticity and original meaning of the Bhagavad Gita.