У нас вы можете посмотреть бесплатно कुरमीयों और आदिवासियों में तकरार,खूनी संघर्ष की आशंका!! или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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झारखंड एक बार फिर से आंदोलन की राह पर चल पड़ा है,कुर्मी वर्सेज आदिवासी विवाद फिर से पनप रहा है कुर्मी अपने लिए आदिवासी स्टेटस का दर्जा मांग रहे है और आदिवासी इसका विरोध कर रहे है। 1 मार्च को रांची के प्रभात तारा मैदान में कुर्मियों के द्वारा एक विशाल सभा का आयोजन किया गया जिसमें लाखों की संख्या में कुर्मी मौजूद थे कई छोटे मोटे नेता भी इस आंदोलन के मंच पर उपस्थित थे मगर कोई भी कुर्मी समाज का बड़ा नेता उपस्थित नहीं हुआ। अपने हक अधिकार की लड़ाई कुर्मी लगातार कर रहे है की उन्हे भी आदिवासी का दर्जा मिले साथ ही कुरमाली भाषा को आठवी अनुसूची मे जगह मिले इसको लेकर पहले भी आंदोलन हुए है रेल टेका डहर छेका आंदोलन आपको याद ही होगा की किस तरह कुर्मी समुदाय द्वारा झारखंड ही नहीं बंगाल सहित कई राज्यों मे रेल रोकने का काम किया गया था। जयराम महतो कुरमियों के इस आंदोलन को पूरा समर्थन करते है जयराम कुर्मियों के अधिकार को लेकर बहुत सजग रहते है मगर प्रभात तर मैदान मे हुए आंदोलन मे जयराम महतो नजर नहीं आए इसको लेकर काफी हलचल भी हुई जयराम से भी ईस बाबत सावल किया गया तो उन्होंने क्या कहा। जयराम का कहना भी सही है 80 विधायकों पर भारी जयराम महतो अगर वहां आते है तो सब नेताओ की छुट्टी हो जाती है फिर उन्हे कोई नहीं पूछता इसी बात को लेकर जयराम वहाँ नहीं गए की कुर्मी समाज के अन्य नेतागण वहां उपस्थित हो , मगर राजनीति के कारण कुर्मी समाज का कोई नेता वहां उपस्थित नहीं हुआ। प्रभात तारा मैदान मे हुए इस सभा से ये स्पष्ट हो गया की कुर्मी समाज के अन्य नेतागण सिर्फ अपनी राजनीती चमकाने के चक्कर मे होते है उन्हे समाज से कोई लेना देना नहीं है। पिछले बार हुए आंदोलन में सभी कुर्मी नेता खिसक गए और जयराम को अकेला छोड़ दिया था जिसके कारण आदिवासी समाज की तरफ से जयराम महतो की काफी खरी खोटी भी सुनाई गई थी,जबकि ये जयराम महतो का आंदोलन न होकर पूरे कुर्मी समाज का आंदोलन था। जयराम को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा पूरा आदिवासी समाज जयराम विरोधी हो गए जिसका असर घाटशिला चुनाव में देखने को भी मिला। अगर सभी कुर्मी नेता साथ देते तो आंदोलन का ठीकरा अकेले जयराम पर तो नहीं फोड़ा जाता, जयराम कुर्मी समाज से आते है मगर वो एक राज नेता भी है जिन्हें हर समाज का समर्थन चाहिए। लोग उन्हें अगले सीएम की तरह देखते है ऐसे में किसी समाज को खुश और किसी समाज को नाराज नहीं कर सकते। महारैली ऐसे समय में हुई है जब आदिवासी संगठनों की ओर से पहले ही विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. कुछ आदिवासी नेता कुड़मी को एसटी में शामिल करने का विरोध करते हैं और इसे सामाजिक संतुलन बिगाड़ने वाला बताते हैं. रैली में कुड़मी नेताओं ने इसे "जवाबी प्रदर्शन" करार दिया. रैली में शामिल लोगों ने संकल्प लिया कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा. यह आयोजन 18 कुड़मी संगठनों के संयुक्त प्रयास से हुआ, जिसे ऐतिहासिक बनाने का दावा किया गया. झारखंड की राजनीति में यह मुद्दा अब और संवेदनशील हो गया है. आपका क्या मानना है कि जयराम महतो वहां उपस्थित न होकर अन्य नेताओं को मंच पर आने का मौका तो दिया मगर समाज के गद्दार नेता मंच पर आना तो दूर इस आंदोलन के समर्थन में एक शब्द भी नहीं किया,मगर जयराम आज भी आंदोलन का पूरा समर्थन करते है,अपनी राय हमे कमेंट में जरूर दे कि जयराम ने आंदोलन में उपस्थित न होकर सही किया या गलत साथ ही हमारे चैनल आपका खबरीलाल को लाइक और सब्सक्राइब जरूर कर ले ताकि अगली खबर सबसे पहले आप तक पहुंचे धन्यवाद। झारखंड समाचार, झारखंड की खबर, जयराम महतो, टाइगर जयराम, डुमरी विधायक, जे के एल एम, अमित महतो, जेएमएम, सुदेश महतो, ज्योत्सना केरकेट्टा, आजसू पार्टी, धनबाद, रांची, आदिवासी, कुरमी आंदोलन, #झारखंड_समाचार, #झारखंड_की_खबर #जयराम_महतो #टाइगर_जयराम #डुमरी_विधायक #जेएलकेएम #अमित_महतो #जेएमएम #सुदेश_महतो #ज्योत्सना_केरकेट्टा #आजसू_पार्टी #धनबाद #रांची #आदिवासी #कुर्मी_आंदोलन