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@DugDugiRajesh टिहरी गढ़वाल की नरेंद्रनगर विधानसभा में आने वाली कोडारना ग्राम पंचायत का कलजौंठी गांव दो हिस्सों में बंटा है। दोनों के बीच में लगभग तीन सौ मीटर की दूरी है। पहले हिस्से में दो मकान हैं, जिनमें बुजुर्ग चंदन सिंह कंडारी, उनकी पत्नी कमला देवी, भाई पूरण सिंह अपनी पत्नी रोशनी देवी के साथ रहते हैं। इनके बच्चे रोजगार के सिलसिले में शहरों में रह रहे हैं। बच्चे इनका ख्याल रखते हैं, जरूरी सामान भेजते हैं और गांव आते जाते रहते हैं। चंदन सिंह कंडारी हमें अपने घर के सामने आम का बागीचा और खेत दिखाते हुए कहते हैं, पानी बिना सब सूखा पड़ा है। सिंचाई की गूल टूट गई हैं। अब तो पीने का पानी भी बहुत कम आता है। उन्होंने पशु पालने बंद कर दिए हैं, क्योंकि फसल नहीं होने पर पशुओं के लिए चारे का संकट बन जाता। वैसे भी इस आयु में उनसे पशुपालन नहीं हो सकता। गांव का दूसरा हिस्सा वीरान है। कभी यहां दो सौ लोग रहते थे, अब इस हिस्से में कोई नहीं रहता। कभी कभार बुजुर्ग रायचंद्र सिंह कंडारी ही आते हैं। हमने इस गांव में आने से पहले सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त रायचंद्र सिंह कंडारी से संपर्क किया था। कंडारी जी से हमारी पहली मुलाकात लगभग तीन साल पहले कलजौंठी गांव में ही हुई थी। वो इन दिनों रानीपोखरी में रहते हैं, पर गांव आते जाते रहते हैं। उनके यहां आने से ऊपरी मंजिल के कमरे में साफ सफाई है, वो यहां कुछ दिन रुकते भी हैं। उनके दोमंजिला मकान की छत से आप पूरे गांव और दूर तक दिखते खेतों को देख सकते हैं। यहां के कच्चे- पक्के दो मंजिला मकान झाड़ झंकाड़ से घिर गए हैं। गली में ऊंची घास का कब्जा हो गया है। घरों के बाहर लगे पशुओं के खूंटे बताते हैं कि यहां पशुपालन खूब होता होगा। पेड़ों पर भालू के पंजों के निशान दिखते हैं। कुल मिलाकर जंगली जानवरों की आमद होती रहती है। घरों के आसपास खेत खाली हैं, जिनमें ऊंची घास उगी है। फलदार पेड़ों की संख्या भी यहां खूब है। पास में ही पहाड़ पर एक बड़ा भवन दिखता है, वो भी खाली है। अगर, इस पूरे इलाके के आबाद होने की कल्पना करें तो कह सकते हैं यहां का अतीत यानी पलायन से पहले की स्थिति बहुत सुहावनी रही होगी। Kaljaunthi Village, Tehri Garhwal, Uttarakhand Migration, Rural Life, Hill Village, Water Scarcity, Uttarakhand, Kodarna Gram Panchayat, Narendranagar Assembly