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कहानी: मोगली और जंगल की सबसे बड़ी सीख गहरे हरे जंगल में मोगली रहता था। वह भेड़ियों के साथ बड़ा हुआ था और जंगल उसका घर था। मोगली तेज़ दौड़ता, ऊँचे पेड़ों पर चढ़ता और हर जानवर से दोस्ती करता था। लेकिन मोगली की एक आदत ठीक नहीं थी—उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। एक दिन मोगली ने बालू से कहा, “मैं जंगल का सबसे बहादुर हूँ। मुझे किसी की मदद की ज़रूरत नहीं।” बालू हँसते हुए बोला, “अरे छोटे दोस्त, अकेली ताकत कभी काम नहीं आती।” मोगली ने बात अनसुनी कर दी। कुछ दिनों बाद गर्मियों में जंगल सूख गया। नदी का पानी कम होने लगा। तभी एक दिन अचानक जंगल में आग लग गई। लपटें तेज़ हवा के साथ फैलने लगीं। जानवर डरकर इधर-उधर भागने लगे। मोगली ने सोचा, “मैं अकेले ही आग रोक लूँगा!” वह दौड़कर आग के पास गया, लेकिन धुएँ से उसकी आँखें जलने लगीं। उसे समझ आ गया कि अकेले कुछ करना आसान नहीं है। तभी बघीरा ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, “सब जानवर इकट्ठा हो जाओ!” हाथी अपनी सूँड में पानी लाने लगे, हिरण सुरक्षित रास्ते दिखाने लगे, बंदर पेड़ों से बच्चों को नीचे उतारने लगे, और बालू सबको हिम्मत देता रहा। मोगली ने भी सबके साथ मिलकर काम किया। उसने पानी पहुँचाया और छोटे जानवरों को सुरक्षित जगह ले गया। थोड़ी देर बाद आग बुझ गई। जंगल फिर से शांत हो गया। मोगली ने सबके सामने सिर झुकाकर कहा, “आज मैंने सीखा कि असली ताकत अकेले में नहीं, सबके साथ मिलकर काम करने में है।” बालू मुस्कुराया और बोला, “यही है जंगल का नियम।” सीख मिल-जुलकर किया गया काम ही सबसे बड़ी ताकत होता है।