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[ महीनों फागण को राजस्थानी लोक प्रिय सोंग ] राजस्थानी नृत्य होली सोंग || वंशिका नृत्य Mahino Fagan Ko Official Song | Seema Mishra | Rajasthani Fagan 2026 | Holi Special | Swar Madhuri Celebrate the colors of Rajasthan with the soulful voice of Seema Mishra! 🌸🙏 "Mahino Fagan Ko" is a tribute to the vibrant spirit of Holi and the timeless beauty of Fagan. Let the beats of the Chang and the melody of the desert fill your heart with joy. tegs- #oneshika877 #dance #rajthani #newrajasthanisong #marwadisong #MahinoFaganKo #SeemaMishra #RajasthaniHoli #Fagan2026 #HoliSpecial #MarwadiSong #RajasthanFolk #LatestRajasthaniSong #HoliDance #oneshika877SwarMadhuri #oneshika877rajthani dance #marwadisong #newsong Song - Mhino Phagan ko Singer - Seema Mishra rajshthani dance marwadi dance mahina fagan song mahino fagan ko song fagan mhino new trending song rajputi dance new fagan song new Holi celebration new holi song folk song rajshthani folk song marwadi dance vayrl song vayrl dance trending song trending fagan song जय राजस्थान- जय राजस्थानी फागण केवल ऋतु नहीं, बल्कि नारी-मन की अनुभूतियों का उत्सव है। ढोलक की थाप, चंग की झंकार और केसरिया धूल में रचा-बसा यह महीना विवाहित स्त्री के हृदय में छुपी कामना, विरह और सुहाग की आकांक्षा को भारत की लोक गीत साम्राज्ञी, राजस्थान की मरु कोकिला सीमा जी मिश्रा का कोकिल कंठ जहां स्वर देता है वहीं इन भावनाओं की रचना गीत के रूप में रचने तथा संगीतबद्ध करने का कार्य राजस्थान के प्रख्यात गीतकार- संगीतकार स्वर्गीय निर्मल जी मिश्रा ने किया। स्वर्गीय निर्मल मिश्रा जी द्वारा रचित इस भावपूर्ण राजस्थानी गीत के बोल हैं:- “म्हीनो फागण को पीया जी, थारी मन में आवे रे”। इस गीत में राजस्थानी नारी (गीत की नायिका)की मांग कोई भारी नहीं बस उतनी जितनी एक सुहागिन के मन की होती है-पांव में चांदी की पायल, हाथ में हथफूल,गले में हार, कांच की चूड़ियां, हल्दी-सी रंगी चुनरी और माथे पर सजने को एक छोटी-सी बोरली। ये आभूषण नहीं, उसके विश्वास के रंग हैं। इस गीत में पूरा स्त्री-मन सिमट आता है। फागण का महीना आते ही नायिका का मन अपने पीया की ओर खिंच जाता है। वह दूर बसे प्रियतम को केवल याद ही नहीं करती, बल्कि उसे भावों के धागों से बाँधकर बुलाने का कोमल आग्रह भी करती है। लोकगीत में सुहाग की सामग्री—हथफूल, चूड़ियाँ, कंगन, पायल, गले में हार, बिछिया, मेंहदी, काजल, लहंगा और ओढ़नी केवल वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि नारी के सौभाग्य और पूर्णता के प्रतीक हैं। जब नायिका कहती है कि फागण आया है, तो उसके शब्दों में यह संकेत छुपा होता है कि अब सुहाग सजाने का समय है। पीया के बिना ये सभी वस्तुएँ अधूरी हैं। लोकनायिका जानती है कि उसका पीया आएगा, क्योंकि फागण स्वयं संदेशवाहक बनकर गया है।इस राजस्थानी गीत का सबसे सुंदर पक्ष उसका भावपूर्ण चित्रण है। कल्पना में रेतीले आँगन में बैठी स्त्री, हाथों में अधूरी चूड़ियाँ, आँखों में प्रतीक्षा और होंठों पर लोकधुन—पूरा दृश्य जीवंत हो उठता है। हवा में उड़ती गुलाल मानो उसके मन के रंग हों,और ढोलक की थाप उसके हृदय की धड़कन। “म्हीनो फागण को पीया जी…” केवल गीत नहीं,बल्कि उस लोकसंस्कृति की आत्मा है जहाँ प्रेम सरल है,आग्रह कोमल है और सुहाग स्त्री के जीवन का उत्सव है। यह गीत आज भी इसलिए जीवित है क्योंकि इसमें हर उस नारी की आवाज़ है, जो फागण आते ही अपने पीया को मन ही मन पुकारती है। राजस्थान की यह नारी अपने प्रेम को शब्दों में नहीं, परंपराओं में बुनती है। उसकी मांग साज-सिंगार की है,पर आग्रह दिल का-कि होली के रंगों के साथ उसका सुहाग भी लौट आए। फागण उसके लिए त्योहार नहीं,मिलन का वादा है। और फागण की इस पुकार में, परदेस की दूरियां भी पिघल जाती हैं-क्योंकि जहां प्रेम रंग बन जाए, वहां राह खुद घर तक आ जाती है। अतः आप सभी राजस्थानी लोकगीत-संगीत प्रेमी प्रबुद्ध श्रोताओं से हमारी बस एक विनती है राजस्थानी लोकगीत- संगीत के संरक्षण,संवर्धन एवं सृजन के लिए कृत संकल्पित स्वर माधुरी मल्टीमीडिया की होली के शुभ पावन अवसर पर एक और भावपूर्ण प्रस्तुति:- "म्हीनो फागण को पीया जी थारी मन में आवे रे"। राजस्थानी गीत का आनंद स्वर कोकिल सीमा जी मिश्रा के कोकिल कंठ से लेते हुए स्वरमाधुरी संग राजस्थानी लोक गीत-संगीत के अविरल प्रवाह में अवगाहन करे तथा स्वर माधुरी मल्टीमीडिया चैनल को सब्सक्राइब करते हुए,ऑडियो-वीडियो को लाइक और शेयर कर अपना स्नेह प्रदर्शित करें,और अपने अमूल्य सुझाव,मार्गदर्शन कमेंट्स में ज़रूर दें। आपका हर समर्थन हमारे लिए प्रेरणा है और हमारे राजस्थान की लोक संस्कृति को जीवित रखने की एक अमूल्य भागीदारी भी।आपका साथ ही हमारी ताकत है