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हनुमान जी का भजन बजरंग बाण स्पष्ट आवाज़ के साथ Powerful Hanuman Bhajan Bajrang Baan clear vocals इस बजरंग बाण को रोज सुनो... दुश्मन को कोई नहीं बचा पाएगा! हनुमान जी का सबसे powerful भजन | Bajrang Baan | बजरंग बाण जय बजरंगबली! हनुमान जी की असीम शक्ति से भरपूर ये बजरंग बाण (Bajrang Baan) सुनने से: दुश्मन भाग खड़े होंगे बुरी नजर, भूत-प्रेत, negative energy तुरंत दूर संकट मोचन हनुमान जी हर समस्या का समाधान करेंगे घर में शांति, सुरक्षा और अपार शक्ति आएगी रोज सुबह या रात को सुनें, 11 बार पाठ करें — असली ताकत महसूस होगी! हनुमान चालीसा + बजरंग बाण का combo effect और भी miraculous है। This audio is copyright ©️ by Himalayan Astro Hindi, any misuse or use without permission will result in copyright strike. [ दोहा : ] निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ [ चौपाई : ] जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥ जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥ बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥ अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥ लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥ अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥ जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥ जै गिरिधर जै जै सुख सागर । सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥ ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥ गदा बज्र लै बैरिहि मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।। ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ ।बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ।। ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥ सत्य होहु हरी शपथ पायके । राम दूत धरु मारू जायके जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।। पूजा जप-तप नेम अचारा । नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।। वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।। पायं परौं कर जोरी मनावौं । येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।। जय अंजनी कुमार बलवंता । शंकर सुवन वीर हनुमंता ।। बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ।। भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर ।। इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ।। जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।। जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।। चरण शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।। उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।। ओम चं चं चं चं चपल चलंता । ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।। ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल । ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।। अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ।। यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै ।। पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।। यह बजरंग बाण जो जापैं । ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।। धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेसा ।। [ दोहा :] प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान । तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान ।।