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अक्षरों से परे: इब्रानी वर्णमाला के छिपे हुए गहरे अर्थ परिचय: जो दिखता है, उससे कहीं ज़्यादा जब हम किसी वर्णमाला के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में अक्षर आते हैं—वे चिह्न जो ध्वनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिन्हें जोड़कर हम शब्द बनाते हैं। यह पढ़ने और लिखने का एक सीधा-सादा ज़रिया है। लेकिन क्या हो अगर कोई वर्णमाला इससे कहीं ज़्यादा हो? प्राचीन इब्रानी वर्णमाला ऐसी ही एक व्यवस्था है। हज़ारों सालों से, इन अक्षरों को केवल ध्वनि के प्रतीकों के रूप में नहीं देखा गया है। ये सिर्फ अक्षर नहीं हैं; ये तस्वीरें, अंक और विचार हैं। प्राचीन परंपरा के अनुसार, हर अक्षर का अपना एक नाम, एक आकार और एक विशेष चित्र होता था, जो उसके गहरे अर्थ को याद रखने में मदद करता था। यह सिर्फ़ एक भाषा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ब्रह्मांड है जो अपने प्रतीकों में गहरे अर्थ छिपाए हुए है। बाइबिल अंक ज्ञान: परमेश्वर के रहस्यों की अंक भाषा क्या आपने कभी सोचा है कि बाइबिल में बार-बार आने वाली संख्याएँ आपके जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं? बाइबिल केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि उसमें छिपे अंकों की भाषा भी परमेश्वर का संदेश देती है। हर अंक का एक आध्यात्मिक अर्थ है और यह हमें जीवन के गहरे सबक सिखाता है। यही है “बाइबिल अंक ज्ञान” – परमेश्वर के रहस्यों को अंकों के ज़रिए समझने का प्रयास। हम इब्रानी वर्णमाला में छिपे पाँच सबसे आश्चर्यजनक और प्रभावशाली रहस्यों को उजागर करेंगे। आइए, इस प्राचीन ज्ञान की दुनिया में एक सफ़र शुरू करें। पहला रहस्य: हर अक्षर एक कहानी कहता है जब अक्षर तस्वीरें बन जाते हैं इब्रानी अक्षरों की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक उनकी चित्रात्मक उत्पत्ति है। हर अक्षर सिर्फ़ एक ध्वनि नहीं है, बल्कि एक तस्वीर है जो एक विचार का प्रतिनिधित्व करती है। यह भाषा को सीधे हमारे भौतिक और वैचारिक दुनिया से जोड़ता है। अलेफ़ (א): यह मूल रूप से एक "बैल" था, जो एक मज़बूत जानवर का प्रतिनिधित्व करता था जो लोगों को काम करने में मदद करता था। बेत (ב): इसका अर्थ है "घर"। यह एक आरामदायक घर की भावना जगाता है जहाँ परिवार एक साथ रहते हैं। दालेत (ד): इसका मतलब "दरवाज़ा" है, और अक्षर का आकार थोड़ा-बहुत दरवाज़े के चौखट जैसा दिखता है। वाव (ו): इसका अर्थ "हुक" या "खूंटी" है, और अक्षर खुद एक हुक जैसा दिखता है। यह दिखाता है कि यह भाषा सिर्फ़ संवाद का एक ज़रिया नहीं थी, बल्कि दुनिया को देखने और समझने का एक तरीक़ा भी थी, जहाँ हर अक्षर अपने आप में एक कहानी कहता था। दूसरा रहस्य: मौन की शक्ति और पहला अक्षर पहले अक्षर का मौन संदेश वर्णमाला का पहला अक्षर अलेफ़ (א) है, और इसमें एक गहरा विरोधाभास छिपा है। अलेफ़ की ख़ासियत यह है कि "यह अपने आप में कोई ध्वनि नहीं निकालता।" यह एक मूक अक्षर है। इसके बावजूद, यह "बहुत महत्वपूर्ण" है। इसका चित्र एक मज़बूत बैल का है, जो शक्ति का प्रतीक है। यह हमें एक गहरा आध्यात्मिक सबक सिखाता है: महत्व और शक्ति हमेशा ज़ोर-शोर से व्यक्त नहीं होते। कभी-कभी सबसे बड़ी ताक़त मौन में निहित होती है, ठीक उसी तरह जैसे अलेफ़ बिना आवाज़ के भी पूरी वर्णमाला का नेतृत्व करता है। तीसरा रहस्य: अक्षरों में छिपा गणित का जादू अक्षरों का संख्यात्मक संसार इब्रानी वर्णमाला में हर अक्षर का एक संख्यात्मक मान भी होता है। यह अवधारणा भाषा में अर्थ की एक और परत जोड़ती है। लेखिका और बाइबिल अंकशास्त्र की शोधकर्ता अंगुरी जॉन के अनुसार, यह बाइबिल अंकशास्त्र (Biblical Numerology) और गेमाट्रिया (Gematria) के अध्ययन का आधार है। इसका मतलब है कि हर शब्द का एक संख्यात्मक मान होता है, जो उसके गहरे या छिपे हुए अर्थ को प्रकट कर सकता है। काफ़ (כ): वर्णमाला में इसका स्थान 11वाँ है, लेकिन इसका संख्यात्मक मान 20 है। गिमेल (ג): इसका स्थान और संख्यात्मक मान दोनों 3 हैं। यह प्रणाली हमें सिखाती है कि पवित्र ग्रंथों में कुछ भी संयोग नहीं है। हर शब्द, हर नाम एक गहरे, गणितीय ताने-बाने का हिस्सा हो सकता है, जो ब्रह्मांड के दिव्य क्रम की ओर इशारा करता है। https://biblenumbers101.com/ बाइबिल अंक विज्ञान का महत्व प्राचीन हिब्रू और ग्रीक परंपराओं में अंकों (Numbers) को केवल गिनती के लिए नहीं, बल्कि एक दिव्य भाषा माना गया है। यही सोच बाइबिल में भी झलकती है। हिब्रू अक्षरों और अंकों का रहस्य: (Hebrew Gematria) बाइबिल के अंक रहस्य को और गहराई से दिखाता है। हर अंक का एक विशेष संदेश है, जो हमें जीवन, विश्वास और परमेश्वर की योजना को समझने में मदद करता है। प्रमुख अंकों के आध्यात्मिक अर्थ 1 → एकता और परमेश्वर की शक्ति “यहोवा हमारा एक है।” (व्यवस्थाविवरण 6:4) यह अंक हमें सिखाता है कि परमेश्वर ही सबका आरंभ और सबका केंद्र है। 3 → त्रित्व और दिव्य पूर्णता पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। यह अंक दिव्य रहस्य और सामंजस्य को दर्शाता है। 7 → पूर्णता और परिपूर्णता सृष्टि सात दिन में पूरी हुई। यह अंक हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का काम सदैव सिद्ध होता है। 12 → शासन और व्यवस्था 12 गोत्र और 12 शिष्य — यह अंक संगठन और दिव्य योजना का प्रतीक है। 40 → परीक्षा और तैयारी मूसा के 40 दिन पर्वत पर, यीशु का 40 दिन का उपवास। यह अंक संघर्ष और आत्मिक तैयारी का संदेश देता है। 50 → स्वतंत्रता और उत्सव Pentecost (पचासवाँ दिन) पवित्र आत्मा का दिन है। यह अंक स्वतंत्रता और नए आरंभ का संकेत है। 70 → व्यापकता और दिव्य योजना 70 बुज़ुर्ग, 70 राष्ट्र — यह अंक परमेश्वर की योजना की पूर्णता और विस्तार को दर्शाता है।