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SENGE SUSUNG KAJIGE DURANG 2026 / MUNDARI TRADITIONAL SONG/ MUNDARI RUH #mundari *मुंडारी बानी (Mundari Bani) लिपि पर आलोचना व चर्चा* मुंडारी भाषा आदिवासी समाज—खासकर मुंडा समुदाय—की पहचान, संस्कृति और इतिहास की आत्मा है। लंबे समय तक यह भाषा केवल *मौखिक परंपरा* में जीवित रही। इसी कमी को दूर करने के लिए *मुंडारी बानी लिपि* का विकास हुआ, ताकि भाषा को लिखित रूप मिल सके और आने वाली पीढ़ियाँ इसे सीख-समझ सकें। --- 1. मुंडारी बानी लिपि क्या है मुंडारी बानी एक *स्वतंत्र लिपि* है, जिसे विशेष रूप से मुंडारी भाषा की ध्वनियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसकी बनावट देवनागरी या रोमन से अलग है और इसमें मुंडारी के स्वर-व्यंजन, नासिक ध्वनियाँ और उच्चारण की बारीकियाँ बेहतर ढंग से व्यक्त होती हैं। --- 2. लिपि की आवश्यकता **भाषाई संरक्षण**: बिना लिपि के कोई भी भाषा धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है। **शिक्षा में उपयोग**: मातृभाषा में पढ़ाई होने से बच्चों की समझ बेहतर होती है। **सांस्कृतिक पहचान**: गीत, कथा, इतिहास, सरना-धर्म की मान्यताएँ सुरक्षित रहती हैं। **शोध और साहित्य**: लिखित साहित्य के बिना अकादमिक अध्ययन संभव नहीं। --- 3. सकारात्मक पक्ष (Strengths) मुंडारी ध्वनियों के अनुकूल लिपि अपनी अलग पहचान मौखिक ज्ञान को लिखित रूप देने की क्षमता आदिवासी अस्मिता को मजबूत करने का माध्यम --- 4. आलोचनात्मक पक्ष (Challenges) **प्रचार की कमी**: बहुत कम लोग बानी लिपि पढ़-लिख पाते हैं। **शैक्षणिक समर्थन का अभाव**: स्कूल-कॉलेजों में इसे जगह नहीं मिली। **डिजिटल समस्या**: यूनिकोड, फॉन्ट, कीबोर्ड की सीमित उपलब्धता। **एकरूपता की कमी**: अलग-अलग क्षेत्रों में लिखने के तरीके में अंतर। --- 5. वर्तमान स्थिति आज भी अधिकांश मुंडारी भाषी लोग *देवनागरी या रोमन* में मुंडारी लिखते हैं, क्योंकि वही आसानी से उपलब्ध है। इससे बानी लिपि का विकास धीमा पड़ा है। अगर यही स्थिति रही, तो भविष्य में यह लिपि केवल किताबों तक सीमित रह सकती है। --- 6. आगे का रास्ता (Suggestions) प्राथमिक स्तर से *मातृभाषा शिक्षा* में बानी लिपि शामिल हो *सरकारी मान्यता* और पाठ्यक्रम में जगह *डिजिटल फॉन्ट, कीबोर्ड, मोबाइल सपोर्ट* युवाओं द्वारा गीत, रैप, कविता, सोशल मीडिया कंटेंट बानी लिपि में समुदाय स्तर पर कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण --- निष्कर्ष मुंडारी बानी लिपि सिर्फ लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि *अस्तित्व की लड़ाई* है। यदि समाज, युवा और सरकार मिलकर इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो मुंडारी भाषा की आत्मा कमजोर पड़ जाएगी। *“भाषा बचेगी, तभी पहचान बचेगी।”*