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( 1 ) बराबर गुफाओं (Barabar Caves) की पहाड़ी पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ शिव मंदिर मुख्य आधार से लगभग 400 से 1000 फीट की ऊँचाई (अलग-अलग स्रोतों के अनुसार) पर स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए खड़ी चढ़ाई पर लगभग 400 से 500 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। स्थान: यह मंदिर बिहार के जहानाबाद जिले में बराबर की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित है Jagran। ऊँचाई और पहुँच: आधार से लगभग 400 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह गुफाओं का समूह है और ऊपर चोटी पर मंदिर है। समय: पहाड़ी की चोटी तक चढ़ने में आमतौर पर 40-60 मिनट का समय लग सकता है। अन्य विशेषताएँ: यह 7वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर है, जिसे बाना राजा द्वारा निर्मित माना जाता है। बाराबर गुफाएँ - सुल्तानपुर में पुरातत्व स्थल - वेबसाइट Translated — पहाड़ की चोटी पर 400 सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद एक मंदिर है। यहाँ तक पहुँचने में 40-60 मिनट का समय लग सकता है। इस स्थान का इतिहास यह है कि बाराबर गुफाओं का नि barabar-caves.com-place.com Open 24 hours बराबर की गुफाओं का निर्माण मुख्य रूप से मौर्य सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल के दौरान, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में, आजीविक संप्रदाय के तपस्वियों के लिए करवाया था। उनके पोते दशरथ ने भी बाद में नागार्जुनी पहाड़ियों पर कुछ गुफाएँ बनवाईं, जो इसी उद्देश्य के लिए थीं। निर्माता: सम्राट अशोक (मौर्य शासक)। समय: मौर्य काल (लगभग 322 ईसा पूर्व - 185 ईसा पूर्व)। उद्देश्य: आजीविक संप्रदाय के साधुओं के लिए आवास और ध्यान के लिए। स्थान: बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित हैं। विशेषता: ये भारत की सबसे पुरानी चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएँ हैं, जिनकी पॉलिश की हुई दीवारें और अद्भुत ध्वनि गूँज उनकी पहचान है। 2300 साल पुरानी बौद्ध गुफा, Barabar Caves की ये कहानी आपको हिला देगी ... लोगों के भलाई के लिए कई बड़े कार्य किए उन्होंने बराबर की पहाड़ियों में गुफाओं का निर्माण कराया था इन गुफाओं में आज भी अशोक के समय के. शिलालेख मौजूद हैं आजीविक संप्रदाय के तपस्वियों के निवास करने के लिए बनवाया था इन गुफाओं ( 2 ) बोधगया बिहार के गया जिले में स्थित बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ लगभग 2600 साल पहले भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ था। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, महाबोधि मंदिर और पवित्र बोधि वृक्ष यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं, जो दुनिया भर से श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिकता के लिए आकर्षित करते हैं। बोधगया के मुख्य आकर्षण और महत्व: महाबोधि मंदिर: यह मंदिर 5वीं-6वीं शताब्दी में निर्मित एक पिरामिडनुमा संरचना है, जो प्राचीन ईंट वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। बोधिवृक्ष: मंदिर परिसर में स्थित वह पवित्र पीपल का पेड़, जिसके नीचे सिद्धार्थ गौतम ने ध्यान लगाकर ज्ञान प्राप्त किया था। वज्रासन: बोधि वृक्ष के पास स्थित वह पत्थर का आसन, जहाँ बैठकर बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। अन्य आकर्षण: यहाँ विभिन्न बौद्ध देशों (जैसे थाईलैंड, जापान, भूटान) द्वारा निर्मित मठ और मंदिर, साथ ही 80 फीट ऊंची बुद्ध की प्रतिमा भी प्रमुख हैं। यात्रा की जानकारी: सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च के बीच, जब मौसम सुखद होता है। पहुंचें कैसे: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा गया (Gaya) है (लगभग 12-17 किमी) और रेलवे स्टेशन भी गया जंक्शन है। उत्सव: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ विशेष भव्य आयोजन होते हैं। बोधगया का पुराना नाम उरुवेला था और यह फल्गु नदी के किनारे स्थित है। यह न केवल बौद्ध अनुयायियों के लिए, बल्कि शांति और ज्ञान की खोज करने वालों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। महाबोधि मंदिर, बोधगया में स्थित वह पवित्र स्थल है जहाँ गौतम बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह स्थल यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया ... बोधगया, बिहार का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां गौतम बुद्ध ने अपने बोध की प्राप्ति की थी। यह स्थान बौद्ध धर्म के लिए पवित्र माना जाता है और यहां के महाबोधि मंदि... ( 3 ) बोधगया | पवित्र स्थल Translated — बुद्ध के ज्ञानोदय का स्थल ... आधुनिक भारत के उत्तर-पूर्वी प्रांत बिहार में स्थित बोध गया, गया जिले में स्थित है। [i] बोध गया, फल्गु नदी के ठीक बगल में स्थित है, विष्णुपद मंदिर, गया (बिहार) के फल्गु नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जो लगभग सेमी लंबे पदचिह्न (चरणपादुका) के लिए प्रसिद्ध है। 1787 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित यह 100 फीट ऊँचा मंदिर हिंदू धर्म में पिंडदान और पूर्वजों की मुक्ति (मोक्ष) के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है, जहाँ गयासुर राक्षस को दबाने की पौराणिक कथा जुड़ी है।