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UGC NET हिंदी (इकाई-5) का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से हिंदी कविता पर आधारित है, जिसमें आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक की प्रमुख काव्य रचनाएँ शामिल हैं। इसमें पृथ्वीराज रासो (रेवा तट), विद्यापति, अमीर खुसरो, कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास, बिहारी, घनानंद, आधुनिक कवियों (भारतेंदु, निराला, प्रसाद, पंत, महादेवी, अज्ञेय, मुक्तिबोध, नागार्जुन) की प्रसिद्ध कविताएँ सम्मिलित हैं। UGC NET हिंदी साहित्य: इकाई 5 - हिंदी कविता पाठ्यक्रम यह इकाई हिंदी के पद्य साहित्य की समझ को परखती है: आदिकाल और भक्तिकाल: पृथ्वीराज रासो: रेवा तट (सं. हजारी प्रसाद द्विवेदी, नामवर सिंह)। अमीर खुसरो: खुसरो की पहेलियां और मुकरियां। विद्यापति: पदावली (सं. डॉ. नरेन्द्र झा) - पद संख्या 1-25। कबीर: (सं. हजारी प्रसाद द्विवेदी) - पद संख्या 160-209। जायसी: पद्मावत (सं. श्यामशंकर दुबे) - नागमती वियोग खंड। सूरदास: भ्रमरगीत सार (सं. रामचन्द्र शुक्ल) - पद संख्या 21-70। तुलसीदास: रामचरितमानस, उत्तरकांड। मीरा: (सं. विश्वनाथ त्रिपाठी) - पद संख्या 1-20। रीतिकाल: बिहारी: बिहारी सतसई (सं. जगन्नाथदास रत्नाकर) - दोहा 1-50। घनानंद: घनानंद कवित्त (सं. विश्वनाथ मिश्र) - कवित्त 1-30। आधुनिक काल: भारतेन्दु: प्रेम माधुरी, प्रेम सरोवर। अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध': प्रियप्रवास। मैथिलीशरण गुप्त: साकेत (नवम सर्ग), भारत-भारती। जयशंकर प्रसाद: आंसू, कामायनी (श्रद्धा, ईड़ा सर्ग)। सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': जूही की कली, जागो फिर एक बार, सरोज स्मृति, राम की शक्ति पूजा, कुकुरमुत्ता, बांधो न नाव इस ठाँव बंधु। सुमित्रानंदन पंत: मौन निमंत्रण, परिवर्तन, प्रथम रश्मि। महादेवी वर्मा: बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ, मैं नीर भरी दुख की बदली, फिर विकल हैं प्राण मेरे, यह मंदिर का दीप इसे नीरजा न जलने देना। रामधारी सिंह 'दिनकर': उर्वशी (तृतीय अंक), कुरुक्षेत्र (प्रथम सर्ग)। अज्ञेय: कलगी बाजरे की, यह दीप अकेला, हरी घास पर क्षण भर, असाध्य वीणा, कितनी नावों में कितनी बार। गजानन माधव 'मुक्तिबोध': भूल-गलती, ब्रह्मराक्षस, अंधेरे में [1 #ugcnet2026 #netjrf #assistantprofessor #poojaacademy #ugcnet #jrf #ugcnetpreparation #hindinet #ntaugcnet #unit5 #teachingnotes #handwritten