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डिग्गी श्री कल्याण जी तीर्थ भारत देश के राजस्थान प्रान्त में टोंक जिले में मालपुरा के पास स्थित है यहाँ का मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है इसकी पूजा श्री डिग्गी कल्याण जी के रूप मेकी जाती है संक्षेपमें इसे श्री जी के मंदिर के रूप में जाना जाता है । इस मंदिर का निर्माण ५६०० वर्ष पूर्व राजा डिगवा ने करवाया था । कथा पूर्व की बात है की स्वर्ग में राजा इंद्र के दरबार में उर्वशी नामक अप्सरा थी वह इन्दर के मनोरंजन हेतु नृत्य कर रही थी इसी दौरान वह हसने लगी जो इन्दर को अच्छा नही लगा और इन्दर ने उसका स्वर्ग से निष्कासन कर दिया जिस से उसे १२ वर्ष के लिय मृत्युलोक में आना पड़ा । यहाँ उसने संतो की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर वापस स्वर्ग में जाने की तय्यारी करने लगी । इसी दौरान राजा डिगवा ने उर्वशी को किसी बगीचे में देखा व उसके रूप से बड़ा आकृष्ट हुआ और उसे अपने महल में आने व रहने का निमंत्रण दिया । उर्वशी ने विनय पूर्वक इस आग्रह को ठुकरा दिया और बताया की वह स्वर्ग के राजा इंद्र की है । राजा डिगवा ने इन्दर को युद्ध कीचुनौती दे दी व युद्ध प्रारम्भ हो गया पर हार जीत किसी की नही हो रही थी कपट द्वारा इंद्र ने राजा डिगवा को पराजित कर दिया । उर्वसी ने राजा को कुष्ट हो जाने का श्राप दिया । राजा डिगवा श्री कल्याण जी के क्षेत्रमे भगवान विष्णु की आराधना करने लगे जिस परआकाशवाणी हुई की नदी किनारे भगवान विष्णु की मूर्ती प्राप्त होगी अतः मंदिर बनाकर उस मूर्ती की प्राण प्रतिष्ठा करवा ले जिससे कुष्ट रोग समाप्त हो जाएगा । इस सन्दर्भ में ऐसा ही हुआ और प्राप्त मूर्ती की अपने द्वारा बनवाए हुए मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा करवा दी और वे कुष्ट सेमुक्त हो गए । आज भी कुष्ट व अनेक चर्म रोगों से पीड़ित व्यक्ति श्री कल्याण जी के मंदिर में पूजाकरते हुए मिलतेहै । राजस्थान के जयपुर से सहस्त्रो श्रद्धालु पद यात्रा करते हुए डिग्गी पहुँचते है । मंदिर भव्य है श्री विग्रह अत्यंत मन को भाने वाला है । दर्शन व पूजा से मन को अति शांती मिलती है ।