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Set of 8 slokams composed on Mannargudi Sri Rajagopalaswamy by Sri Sri Anna Laghustotramala Part 4 Stotram 19 चम्पकाट विवासिनं सित पूर्णचन्द्र समाननम् चन्दनादि सुगन्धलेपन युक्तचारु भुजान्तरम् | चन्द्रिका विशदस्मिताञ्चित कुञ्चिताधर संपुटम् राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || गोभिलादि मुनीन्द्र वन्दित पाद शोभित नूपुरं गोप गोकुल गोपिकाजन गोपबालक सम्युतम् | गोपिकजन कोमलाधर चुम्बिताधर विद्रुमं राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || राधिकांस निवेशितायत बाहु शोभित कङ्कणं रत्न राजित रम्यकिङ्किणि शोभि चारु नितम्बकम् | रासमोहित गोप सुन्दरि कुङ्कुमाङ्कित वक्षसं राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || चारु चम्पक वृक्षमूलनिकेतनं यदुनन्दनम् चन्द्र पाण्डुर धेनु चुम्बित पाद कोमल पल्लवम् | चौर्य केली विशारदम् दधि पूर्ण पद्म दलोदरं राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || हस्त शोभित केलि यष्टिमनन्त सद्गुणशालिनं हारयष्टि विराजितायत वक्षसं वनमालिनम् | हेम नीरज सुन्दरीपतिमाश्रितार्तिविनाशकम् राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || गोपिकजनमध्यकल्पित वारिकेलि विलासिनं गोपिकाहृत वस्त्रभूषणमद्भुताङ्ग दिगम्बरं | गोपिकाकर दत्त कुण्डल वस्त्रधारिणमीश्वरं राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || रुक्मिगर्वविभञ्जकं वर रुक्मभूषण भूषितं रुक्मणीपतिमाश्रितावन तत्परञ्च बलावरम् | द्वारकापुरनायकं यदुवंश वारिधि कौस्तुभम् राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || धर्मनन्दनदारमान सुरक्षकं दधिभक्षकं कर्णजिद्रथभूषणं परमात्म तत्वसुभाषणम् | भीष्म भाषितपालनं निज भक्तपोषनकारिणं राजगोपमहं भजे व्रजराजनन्दनमच्युतम् || राजगोपाष्टकं पुण्यं प्रेमिकेण प्रकीर्तितं यः पठेत् श्रद्दया नित्यं स हि मङ्गलमाप्नुयात् || Mannargudi Kolatta utsavam: • Brindavanam Thanil Anandamagave | Sri Sri ...