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सनातन धर्म में भगवान विष्णु को पालनकर्ता माना गया है। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ा, तब-तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लिया। इन दिव्य अवतारों को ही दशावतार कहा जाता है। प्रत्येक अवतार एक विशेष युग, परिस्थिति और उद्देश्य को दर्शाता है, जिससे मानवता को सही मार्ग प्राप्त हो सके। भगवान का प्रथम अवतार मत्स्य था, जिन्होंने प्रलय के समय वेदों और मनु की रक्षा की। इसके बाद कूर्म अवतार में समुद्र मंथन के समय उन्होंने मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। वराह अवतार में भगवान ने पृथ्वी को हिरण्याक्ष से बचाकर रसातल से बाहर निकाला। अधर्म के विनाश हेतु भगवान ने नरसिंह अवतार लिया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते हुए हिरण्यकशिपु का अंत किया। इसके पश्चात वामन अवतार में भगवान ने राजा बलि का अहंकार समाप्त कर तीन पग में तीनों लोक नाप लिए। परशुराम अवतार में भगवान ने अत्याचारी क्षत्रियों का विनाश कर धर्म की स्थापना की। राम अवतार मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का प्रतीक है, जहाँ भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की विजय सुनिश्चित की। इसके बाद कृष्ण अवतार में भगवान ने गीता का उपदेश देकर कर्म, भक्ति और ज्ञान का मार्ग दिखाया तथा अधर्मियों का संहार किया। बुद्ध अवतार में भगवान ने अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश दिया। अंत में, कलियुग के अंत में कल्कि अवतार होने की भविष्यवाणी है, जिसमें भगवान अधर्म का पूर्ण विनाश कर सत्य युग की स्थापना करेंगे। दशावतार केवल पौराणिक कथाएँ नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए गहन संदेश हैं। ये हमें सिखाते हैं कि सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलकर हर संकट का समाधान संभव है। 🙏 भगवान विष्णु के दशावतारों की यह कथा जीवन को पवित्र और सार्थक बनाती है।