У нас вы можете посмотреть бесплатно GEETOKTA VARNA или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
गीतोक्त वर्ण : आरंभ से पूर्तिपर्यन्त साधना के चार क्रमोन्नत सोपान - शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय तथा ब्राह्मण चार वर्ण हैं। चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः। तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्।। (यथार्थ गीता, 4/13) अर्जुन! ‘चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं’ - चार वर्णों की रचना मैंने की। तो क्या मनुष्यों को चार भागों में बाँट दिया? श्रीकृष्ण कहते हैं- नहीं, 'गुणकर्मविभागशः'- गुणों के माध्यम से कर्म को चार भागों में बाँटा। गुण एक पैमाना है, मापदण्ड है। वर्ण एक ही साधना पथ के चार सोपान हैं और सारा संसार इन चारों वर्णों के अंतर्गत है। बाहर (जातियों में) वर्ण हो ही नहीं सकता। क्रियात्मक चलने की अपनी क्षमता के अनुसार कर्म न कर अपने से उन्नत श्रेणी वालों की नकल करना, प्रकृति में भटकना वर्ण संकर है। Place: JAGTANAND Dated: 30-05-2012 More on Yatharth Geeta and Ashram Publications: http://www.yatharthgeeta.com/ Download Official Yatharth Geeta Application on Android and iOS to Stay in Touch. © Shri Paramhans Swami Adgadanandji Ashram Trust.